रायपुर 14 जुलाई।छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज औद्योगिक दुर्घटनाओं पर कार्रवाई को लेकर उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के जवाब से असन्तुष्ट कांग्रेस सदस्यों ने नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रश्नोत्तरकाल में राज्य में उद्योगों में सेफ्टी आडिट करवाने तथा सक्ती जिले के वेदांता संयंत्र हादसे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हादसे में 25 लोगों की मौत हुई और 7 लोग अब भी घायल हैं।उन्होंने पूछा कि हादसे के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई और जांच किस चरण में है। साथ ही उन्होंने यह भी सवाल किया कि कंपनी के निदेशक अनिल अग्रवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद उनसे पूछताछ के लिए क्या कोई टीम इंग्लैंड भेजी गई है।
उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि उद्योगो में सेफ्टी आडिट का कार्य एक वर्ष मैं करवाया जाता है।पांच औद्योगिक दुर्घटनाओं में सेफ्टी ऑडिट कराया गया है। उन्होंने कहा कि वेदांता लिमिटेड के मामले में अरुण मिश्रा, योगेंद्र पटेल, कंपनी के निदेशक अनिल अग्रवाल सहित अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। विभाग ने श्रम न्यायालय में याचिका भी दायर की है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। मंत्री ने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल उठाया कि क्या भविष्य में भी औद्योगिक हादसों में सभी निदेशकों पर इसी तरह कार्रवाई होगी। इस पर मंत्री ने कहा कि कानून के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।श्री बघेल ने आरोप लगाया कि किसी और को फायदा पहुंचाने के लिए अनिल अग्रवाल पर दवाब बनाने एफआईआर की गई है।भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि किसी व्यक्ति विशेष का नाम लेकर सदन में कार्रवाई की मांग करना उचित नहीं है। अस पर श्री बघेल ने यह भी सवाल उठाया कि कहीं किसी पर दबाव बनाकर फैक्ट्री बिकवाने की मंशा तो नहीं है।
इस दौरान कांग्रेस सदस्य राम कुमार यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री सहायता कोष से पांच लाख तथा केन्द्र सरकार की ओर से दो लाख रूपए के सहायता की घोषणा हुई है लेकिन अभी तक पीडित परिवारों को यह राशि नही मिली।मंत्री ने कहा कि कंपनी की ओर से 35-35 लाख रूपए बतौर मुआवजा दिया गया है।सरकारी मदद की राशि भी दी गई है।वेदांता हादसे के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और नारेबाजी हुई। विवाद बढ़ने पर विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन कर दिया।




