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राम मंदिर ट्रस्ट पर शंकराचार्य का बड़ा हमला, CEO भर्ती प्रक्रिया पर उठाए सवाल; नए ट्रस्ट के गठन की मांग

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वाराणसी, 14 जुलाई। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी और सुरक्षा व्यवस्था में चूक की जांच के बीच मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह जताया है।

      श्री शंकराचार्य ने कहा कि ट्रस्ट की ओर से शुरू की गई CEO नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी नहीं दिखाई देती और यह जनता को भ्रमित करने का प्रयास प्रतीत होती है। उन्होंने ट्रस्ट पर वित्तीय अनियमितताओं और जवाबदेही के अभाव के आरोप लगाते हुए मौजूदा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की मांग की।

      उन्होंने विशेष रूप से CEO पद के लिए जारी विज्ञापन और पात्रता संबंधी मापदंडों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब ट्रस्ट का गठन किया गया था, तब ऐसी खुली भर्ती प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई। उनके अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में इस नियुक्ति प्रक्रिया का समय कई तरह के संदेह पैदा करता है।

      शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया है। उनका कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया वास्तव में निष्पक्ष है तो उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।

      उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था को लेकर उठे सवालों का संतोषजनक समाधान होना चाहिए। उनके अनुसार, जिन लोगों की भूमिका पर संदेह है या जिनकी निगरानी में कथित गड़बड़ियां हुई हैं, उनकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

      शंकराचार्य ने सुझाव दिया कि राम मंदिर के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता और धर्माचार्यों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया के करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़े इस विषय में विश्वास और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।