नई दिल्ली, 28 जुलाई। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए और उनके खिलाफ फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
हालांकि, सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस कानून के अनुसार एफआईआर दर्ज करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह राहत केवल पहली बार प्रदर्शन में शामिल हुए और आपराधिक रिकॉर्ड से मुक्त लोगों को मिलेगी। जिन व्यक्तियों का आपराधिक रिकॉर्ड है, वे इस अंतरिम राहत के दायरे में शामिल नहीं होंगे।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें आरोप लगाया गया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू होकर महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल और केरल सहित कई राज्यों में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया।
बल प्रयोग के आरोपों पर कोर्ट गंभीर
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि NEET-UG 2026 पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया। साथ ही पैलेट गन, आंसू गैस और इलेक्ट्रिक हथियारों के इस्तेमाल के भी आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस कार्रवाई से संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 20 और 21 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया लगाए गए आरोप स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश
अदालत ने देशभर में छात्र प्रदर्शनों से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। इसके तहत सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-कैमरा वीडियो, वायरलेस संचार और पुलिस कंट्रोल रूम (PCR) के रिकॉर्ड को संरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं। साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि प्रदर्शनकारियों का डिजिटल डेटा सुरक्षित रखा जाए और उनकी व्यक्तिगत जानकारी या डेटा किसी भी रूप में सार्वजनिक न किया जाए।
3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित की है। अदालत ने उस दिन संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGP) को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।




