नई दिल्ली, 28 जुलाई। संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशन (गलत तरीकों से बचाव) संशोधन विधेयक, 2026 पर विस्तृत चर्चा शुरू हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर तीखी बहस और नोकझोंक देखने को मिली।
विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की सदन में अनुपस्थिति पर सवाल उठाए, जबकि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार की ओर से इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा का समय बढ़ाकर 10 घंटे करने का प्रस्ताव रखा।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार की नीयत भी साफ होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वादों की बजाय केवल बड़े-बड़े दावे करती है।
वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित बल प्रयोग का मुद्दा उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि छात्रों पर पैलेट गन और अन्य हथियारों के इस्तेमाल की जरूरत क्यों पड़ी और इस संबंध में आदेश किस स्तर से जारी किए गए। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
प्रियंका गांधी ने रोजगार और परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उनका आरोप था कि पिछले वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे करोड़ों अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि पेपर लीक के मामलों में अब तक दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
शिक्षा व्यवस्था पर भी कांग्रेस सांसद ने सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शिक्षा प्रणाली का अत्यधिक केंद्रीकरण होने से समस्याएं बढ़ी हैं और शिक्षा के बजट में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है।
बहस के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को देखते हुए संसद में कानून लेकर आई है। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा कर कानून बनाना किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई से बेहतर है।
इस पर अखिलेश यादव ने जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने आपातकाल नहीं देखा, लेकिन उसकी झलक राजधानी में देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष बनाने के लिए सरकार की नीयत सबसे महत्वपूर्ण है।
सदन में जारी हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप करते हुए सभी दलों से इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सार्थक चर्चा करने की अपील की। उनकी पहल पर सदन में इस विषय पर छह घंटे की चर्चा का समय निर्धारित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सभी राजनीतिक दलों को सकारात्मक और रचनात्मक सहयोग देना चाहिए।
गौरतलब है कि यह संशोधन विधेयक केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में पेश किया था। विधेयक पेश किए जाने के दौरान विपक्ष ने छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई और उससे जुड़े मुद्दों को लेकर सदन में जोरदार विरोध दर्ज कराया।




