होम छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ी-हिंदी लोक शब्दकोश के निर्माण में जुटे तीन छत्तीसगढ़ी भाषाविद

छत्तीसगढ़ी-हिंदी लोक शब्दकोश के निर्माण में जुटे तीन छत्तीसगढ़ी भाषाविद

0

रायपुर, 27 अगस्त। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा में छत्तीसगढ़ी-हिंदी लोक शब्दकोश के निर्माण का महत्वपूर्ण कार्य जारी है। संस्थान की लोक शब्दकोश निर्माण परियोजना के तहत 24 से 28 अगस्त तक आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के तीन भाषाविद एवं साहित्यकार डॉ. सुधीर शर्मा, डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ और विजय मिश्रा ‘अमित’ विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए हैं।

     कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. हरिशंकर ने छत्तीसगढ़ से पहुंचे तीनों विशेषज्ञों का अंगवस्त्र से स्वागत किया। इस अवसर पर संस्थान के प्रो. जोगेंद्र सिंह मीणा, परियोजना प्रभारी डॉ. अरिमर्दन त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष प्रो. सपना गुप्ता, डॉ. मीनाक्षी दुबे तथा कोशकर्मी आकाश भगत और सुष्मिता बारिक उपस्थित रहे।

     कार्यशाला में छत्तीसगढ़ी भाषा के लोक शब्दों को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक रूप से शब्दकोश में दर्ज करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ी लोक शब्दों का आईपीए (इंटरनेशनल फोनेटिक अल्फाबेट) में उच्चारण दर्ज करने के साथ ही पहले से संकलित शब्दों की जांच, उनमें आवश्यक परिवर्धन तथा उनके समानार्थी अंग्रेजी शब्दों को जोड़ने का कार्य किया जा रहा है।

     इस महत्वपूर्ण कार्य में डॉ. सुधीर शर्मा के संपादन एवं मार्गदर्शन में डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ और विजय मिश्रा ‘अमित’ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनका प्रमुख दायित्व छत्तीसगढ़ी के लोक प्रचलित शब्दों की प्रामाणिकता की जांच करने के साथ उनकी भाषिक विशेषताओं को व्यवस्थित रूप से दर्ज करना है।

    केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा तैयार किया जा रहा यह छत्तीसगढ़ी-हिंदी लोक शब्दकोश केवल शब्दों का संकलन भर नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ी की लोकभाषिक समृद्धि को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसमें छत्तीसगढ़ के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित अधिकाधिक लोक शब्दों को शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

    छत्तीसगढ़ी भाषा लंबे समय से अपनी विशिष्ट लोक संस्कृति, बोलचाल, लोकगीतों, कहावतों और मुहावरों के कारण समृद्ध भाषाई परंपरा की पहचान रखती है। ऐसे में लोक शब्दों का वैज्ञानिक ढंग से संकलन और उनका मानकीकृत दस्तावेज तैयार किया जाना भाषा के संरक्षण और अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।