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दिल्ली जल बोर्ड टेंडर मामले में सत्येंद्र जैन को बड़ी राहत, राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दी जमानत

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नई दिल्ली, 3 सितंबर। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) परियोजनाओं के टेंडर में कथित अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को गुरुवार को बड़ी राहत मिली। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने जैन की जमानत याचिका मंजूर कर ली। विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) दिग विनय सिंह ने उन्हें दो लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानती पेश करने की शर्त पर जमानत दी।

     अदालत ने जमानत देते हुए गिरफ्तारी के समय को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत के मुताबिक, एफआईआर दर्ज होने और सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी के बीच करीब 27 महीने का अंतर था। कोर्ट ने इस देरी को असाधारण बताते हुए कहा कि इससे यह सवाल उठता है कि जांच एजेंसी ने दो साल से अधिक समय तक जैन की शारीरिक हिरासत को आवश्यक क्यों नहीं माना।

     मामले में अदालत के विस्तृत कारणयुक्त आदेश का इंतजार है। हालांकि, जमानत की शर्तों के तहत जैन को अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और अदालत की अनुमति के बिना देश से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। जांच के दौरान दिल्ली से बाहर दो दिन से अधिक रहने की स्थिति में भी उन्हें जांच अधिकारी को सूचित कर आवश्यक अनुमति लेनी होगी।

18 अगस्त को हुई थी गिरफ्तारी

       सत्येंद्र जैन को दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने 18 अगस्त 2026 को दिल्ली जल बोर्ड की एसटीपी परियोजनाओं से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार किया था। इसके अगले दिन, 19 अगस्त को अदालत ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी और बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

        गुरुवार को जमानत मिलने के साथ ही इस मामले में जैन को फिलहाल न्यायिक राहत मिल गई है। हालांकि, जमानत का अर्थ मामले में आरोपों से बरी होना नहीं है और जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

क्या है पूरा मामला?

      यह मामला दिल्ली जल बोर्ड की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजनाओं के उन्नयन और क्षमता विस्तार से जुड़े ठेकों में कथित अनियमितताओं का है। मामला मई 2024 में दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। एसीबी ने टेंडर की शर्तों में कथित हेरफेर, आपराधिक साजिश और संदिग्ध रिश्वत भुगतान सहित कई आरोप लगाए हैं।

       जांच एजेंसी का आरोप है कि टेंडर की तकनीकी शर्तों को इस तरह तैयार किया गया कि एक निजी कंपनी Euroteck Environmental Private Limited को लाभ मिल सके। एसीबी ने यह भी आरोप लगाया कि रोहिणी एसटीपी की क्षमता को 15 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) से बढ़ाकर 30 MGD किया गया, जिससे परियोजना की लागत में करीब 123 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। एजेंसी ने इस प्रक्रिया में कमीशन और कथित रिश्वत की रकम को बिचौलियों के माध्यम से विभिन्न आरोपियों तक पहुंचाए जाने का भी दावा किया है।

बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी पर उठाए थे सवाल

      जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जैन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने दलील दी कि एफआईआर दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद उनके मुवक्किल को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि इस दौरान जैन को पूछताछ के लिए केवल एक बार बुलाया गया था और दूसरी बार बुलाए जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

       बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले से संबंधित अधिकांश सामग्री दस्तावेजी है और जांच एजेंसी पहले ही संबंधित दस्तावेज और अन्य सामग्री अपने कब्जे में ले चुकी है। ऐसे में जैन को हिरासत में रखे जाने की आवश्यकता नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि टेंडर से संबंधित फैसले तकनीकी और नीतिगत प्रक्रिया का हिस्सा थे तथा जैन जांच में सहयोग कर रहे थे।

डिजिटल साक्ष्यों पर भी अदालत की नजर

       जमानत आदेश के दौरान अदालत ने डिजिटल साक्ष्यों को लेकर भी अहम टिप्पणी की। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने प्रथम दृष्टया पाया कि एसीबी की ओर से पेश किए गए कुछ व्हाट्सऐप चैट जैन को कथित रिश्वत या किकबैक से सीधे तौर पर नहीं जोड़ते। अदालत ने यह भी नोट किया कि जैन को कथित किकबैक या हवाला लेनदेन से जोड़ने वाले फोन रिकॉर्ड या एसएमएस का स्पष्ट लिंक सामने नहीं आया है।

      अदालत के समक्ष यह तथ्य भी रखा गया कि जिन ठेकों को लेकर आरोप लगाए गए हैं, वे जुलाई 2022 में दिए गए थे। उस समय जैन एक अन्य मामले में गिरफ्तार होकर हिरासत में थे। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर टेंडर प्रक्रिया में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका पर सवाल उठाया था।

एसीबी ने किया जमानत का विरोध

      वहीं, एसीबी ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए दावा किया कि जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है और जैन की भूमिका से संबंधित साक्ष्य एजेंसी के पास मौजूद हैं। अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि जैन ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया और टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

       इस मामले में सत्येंद्र जैन के अलावा दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ एवं आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय, पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव और निजी कंपनियों से जुड़े अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।