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एआई और साइबर युद्ध के दौर में जिम्मेदार पत्रकारिता की जरूरत

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मानसरोवर, आबू रोड, 10 सितंबर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय की भगिनी संस्था राजयोग एज्युकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के मीडिया एवं पीआर विंग की ओर से आयोजित राष्ट्रीय मीडिया महा सम्मेलन का गुरूवार को आबू रोड स्थित मानसरोवर के दिव्य शक्ति अनुभूति हॉल में भव्य शुभारंभ हुआ।

      श्रेष्ठ विश्व के निर्माण हेतु सशक्त मीडिया’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में देशभर से आए पत्रकारों, मीडिया विशेषज्ञों और प्रबुद्धजनों ने पत्रकारिता की वर्तमान चुनौतियों, आध्यात्मिक मूल्यों, सकारात्मक मीडिया तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर युद्ध के बढ़ते खतरे पर विचार व्यक्त किए।

       कार्यक्रम में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. मान सिंह परमार, नई दिल्ली से भारत न्यूज नेटवर्क के सीईओ डॉ. सरफराज सैफी, न्यूज इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ राणा यशवंत, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के जनसंचार विभागाध्यक्ष प्रो. संजय द्विवेदी सहित मीडिया एवं पीआर विंग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजयोगी बीके करुणा भाई, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बीके सरला बहन, राष्ट्रीय संयोजक बीके निकुंज भाई, जयपुर सबजोन प्रभारी बीके सुषमा दीदी और मीडिया विंग की जोनल कोऑर्डिनेटर बीके चंद्रकला बहन प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं।

भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

       अध्यक्षीय संबोधन में राजयोगी बीके करुणा भाई ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को मिलकर सकारात्मक दिशा में कार्य करना होगा। मीडिया समाज में विचार निर्माण और जनमत को प्रभावित करने की महत्वपूर्ण शक्ति रखता है। ऐसे में पत्रकारिता को सकारात्मक सोच, जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

शांति, एकता और विश्वास से बनेगा श्रेष्ठ विश्व

      पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. मान सिंह परमार ने कहा कि जब हम श्रेष्ठ विश्व की कल्पना करते हैं तो वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है। दुनिया को ऐसे वातावरण की आवश्यकता है, जहां शांति, एकता और विश्वास की भावना मजबूत हो तथा मनुष्य एक-दूसरे से जुड़ सकें।

     उन्होंने कहा कि भारत के संविधान में भी विश्व बंधुत्व की भावना निहित है। भारत की संस्कृति अत्यंत प्राचीन और मानवीय मूल्यों पर आधारित रही है। सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना को आगे बढ़ाते हुए समाज और मीडिया को ऐसी भूमिका निभानी चाहिए, जो लोगों को विभाजित करने के बजाय जोड़ने का कार्य करे।

वायरल पोस्ट को सच मानना पत्रकारिता के लिए चुनौती

     प्रख्यात एंकर डॉ. सरफराज सैफी ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान में आना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि एक ही मंच पर बड़ी संख्या में पत्रकारों का एकत्रित होना मीडिया जगत के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।

    उन्होंने वर्तमान दौर में सोशल मीडिया और वायरल पोस्ट के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बार लोग किसी वायरल पोस्ट को बिना सत्यापन के ही सच मान लेते हैं। पत्रकारिता का दायित्व है कि किसी भी सूचना को आगे बढ़ाने से पहले उसकी तथ्यात्मक पड़ताल की जाए।

    डॉ. सैफी ने कहा कि सकारात्मक सोच और सभी धर्मों के मूल सिद्धांतों का सम्मान करने से व्यक्ति और समाज दोनों मजबूत बनते हैं। वर्तमान समय में मीडिया को नकारात्मकता के बजाय सकारात्मकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम करना चाहिए।

एआई और साइबर युद्ध के बढ़ते खतरे पर चेतावनी

      न्यूज इंडिया टीवी के एडिटर इन चीफ राणा यशवंत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए कहा कि एआई आज अनेक क्षेत्रों में मानव के लिए उपयोगी सहायक की भूमिका निभा रहा है, लेकिन इसके साथ गंभीर चुनौतियां भी सामने आ रही हैं।

     उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी तकनीकी शक्ति विकसित करने की होड़ चल रही है, जो भविष्य में मानव नियंत्रण से बाहर हो सकती है। कई देश साइबर युद्ध की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि इस तकनीकी दौड़ के बीच मानव की मूलभूत आवश्यकताओं और उसके भविष्य पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है।

     राणा यशवंत ने कहा कि विज्ञान और तकनीक के वर्तमान दौर में दुनिया एक बेहद संवेदनशील  मोड़ पर खड़ी है। यदि समय रहते इन खतरों को नहीं समझा गया तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। भारत को तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में किसी भी देश से पीछे नहीं रहना चाहिए और इसके लिए अधिक सजग एवं तैयार रहने की आवश्यकता है।

पत्रकारिता में साहस और आध्यात्मिकता जरूरी

     प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि आबू रोड जैसी आध्यात्मिक भूमि पर इस प्रकार का सम्मेलन अपने आप में विशेष महत्व रखता है। पत्रकारिता को आज साहस के साथ-साथ आध्यात्मिक दृष्टिकोण की भी आवश्यकता है। पत्रकारिता की मूल भावना ध्येयनिष्ठ होनी चाहिए और उसका उद्देश्य समाज को सही दिशा देना होना चाहिए।

     उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज संस्थान से जुड़े विभिन्न विंग लगातार समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। मीडिया भी इस जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभा सकता है।

     प्रो. द्विवेदी ने कहा कि जहां संवाद समाप्त होता है, वहां विवाद की शुरुआत होती है। इसलिए संवाद को मजबूत बनाकर अनेक सामाजिक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता केवल व्यक्ति को शिक्षित करने की नहीं, बल्कि उसे संवेदनशील और बेहतर इंसान बनाने की है।

       उन्होंने पत्रकारिता में भरोसे को सबसे महत्वपूर्ण तत्व बताते हुए कहा कि मीडिया पर लोगों का विश्वास तभी कायम रह सकता है, जब पत्रकारिता सच के साथ खड़ी हो। उन्होंने कहा कि दैनिक जीवन में सत्य के मार्ग पर चलना हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन विश्वसनीय पत्रकारिता के लिए सत्य और नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं किया जा सकता।

सकारात्मक मीडिया से बेहतर समाज का निर्माण

    सम्मेलन में बीके निकुंज भाई ने भी सकारात्मक विचार व्यक्त किए और देशभर से पहुंचे अतिथियों एवं पत्रकारों का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि मीडिया समाज में विचारों के निर्माण का प्रभावी माध्यम है और इसके माध्यम से सकारात्मक परिवर्तन की प्रक्रिया को गति दी जा सकती है।

     कार्यक्रम का कुशल संचालन बीके चंद्रकला बहन ने किया। सम्मेलन में मीडिया की सामाजिक जिम्मेदारी, सकारात्मक पत्रकारिता, आध्यात्मिक मूल्यों, तकनीकी बदलाव और भविष्य की चुनौतियों को लेकर विचार-विमर्श किया गया।