नई दिल्ली, 10 सितंबर। छत्तीसगढ़ के जैव विविधता से समृद्ध हसदेव-अरण्य क्षेत्र में तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी पर्यावरण और वन क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा है तथा यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन से किए जा रहे ‘‘पर्यावरण विनाश’’ का एक और उदाहरण है।
जयराम रमेश ने गुरुवार को जारी बयान में तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी में विजेता कंपनी को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि नीलामी में विजेता सीजी सिन-गैस एंड केमिकल्स लिमिटेड है, जो मुंद्रा सिनर्जी लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। उनके अनुसार मुंद्रा सिनर्जी लिमिटेड, अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी को हसदेव-अरण्य क्षेत्र से जुड़े पिछले घटनाक्रमों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर हसदेव-अरण्य में कोयला ब्लॉकों के नए आवंटन अथवा नीलामी पर रोक लगाने की मांग की थी।
रमेश ने दावा किया कि 16 जुलाई 2023 को छत्तीसगढ़ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में भी स्पष्ट किया था कि हसदेव-अरण्य क्षेत्र में किसी नई कोयला खदान के आवंटन या विकास की आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने कहा कि इसके बाद 19 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने नीलामी प्रक्रिया से 40 कोयला ब्लॉकों को बाहर कर दिया था, जिसमें तारा कोयला ब्लॉक भी शामिल था। कांग्रेस महासचिव के मुताबिक, इसके बावजूद अब तारा ब्लॉक की नीलामी आगे बढ़ाई गई है।
जयराम रमेश ने कहा कि हसदेव-अरण्य के स्थानीय आदिवासी और अन्य समुदाय पिछले करीब 15 वर्षों से अपने जंगल, पर्यावरण और आजीविका की रक्षा के लिए आंदोलन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने ग्राम सभाओं के प्रस्तावों, जन अभियानों, धरना-प्रदर्शनों और विरोध मार्चों के माध्यम से लगातार अपनी चिंताएं सरकार के सामने रखी हैं। इन समुदायों द्वारा रायपुर तक विरोध मार्च निकाले जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
कांग्रेस नेता ने तारा कोयला ब्लॉक के भौगोलिक विस्तार और संभावित पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। उनके अनुसार यह ब्लॉक करीब 5,000 एकड़ क्षेत्र में फैला है, जिसमें 4,000 एकड़ से अधिक घना वन क्षेत्र शामिल है। उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित खनन गतिविधियों के लिए 10 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई करनी पड़ सकती है।
रमेश ने कहा कि इतने बड़े प्राकृतिक वन क्षेत्र के नुकसान की भरपाई प्रतिपूरक वनीकरण के जरिए नहीं की जा सकती। उन्होंने प्रतिपूरक वनीकरण की अवधारणा पर सवाल उठाते हुए इसे ‘‘शुरू से ही एक छलावा’’ करार दिया।
उन्होंने हसदेव-अरण्य के आसपास स्थित लेमरू हाथी रिजर्व और हाथियों के आवागमन पर भी चिंता जताई। कांग्रेस महासचिव के अनुसार, तारा क्षेत्र में खनन गतिविधियों से हाथियों के आवागमन वाले महत्वपूर्ण गलियारे प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हाथियों की संख्या में कमी और उनके प्राकृतिक आवास पर बढ़ता दबाव पहले से ही गंभीर चिंता का विषय है।
जयराम रमेश ने दावा किया कि खनन गतिविधियों का प्रभाव केवल हाथियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्र की अन्य वन्यजीव प्रजातियां भी प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि हसदेव-अरण्य जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है और यहां कई ऐसी प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनके संरक्षण को लेकर पहले से चिंता बनी हुई है।
कांग्रेस ने केंद्र सरकार से हसदेव-अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन से जुड़े फैसलों पर पुनर्विचार करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि विकास की परियोजनाओं के साथ पर्यावरण, वन्यजीव, आदिवासी समुदायों की आजीविका और स्थानीय लोगों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
कांग्रेस महासचिव ने तारा कोयला ब्लॉक की नीलामी को इसी व्यापक पर्यावरणीय और सामाजिक संदर्भ में देखने की अपील की है। हालांकि, तारा ब्लॉक की नीलामी और उससे जुड़े पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर कांग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों पर केंद्र सरकार अथवा संबंधित कंपनी का पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है।




