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UPI के नए शुल्क पर घमासान,राहुल गांधी ने लगाया अमेरिकी दबाव का आरोप

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नई दिल्ली, 15 सितम्बर। यूपीआई के जरिए 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारिक भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के फैसले को लेकर कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने इस शुल्क को ‘‘मोदी टैक्स’’ करार देते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है।

      लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ‘‘कम्प्रोमाइज्ड’’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने समर्पण कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बड़े यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की व्यवस्था अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है।

      राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक यूपीआई लेनदेन संख्या के लिहाज से भले ही कुल लेनदेन का करीब पांच प्रतिशत हों, लेकिन इनके जरिए होने वाले लेनदेन का मूल्य यूपीआई के कुल ट्रांजेक्शन वैल्यू का लगभग 65 प्रतिशत है। उनका दावा है कि व्यापारियों पर लगने वाले इस अतिरिक्त खर्च का असर अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR ढांचा

      नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेनदेन के लिए नया MDR ढांचा घोषित किया है। इसके तहत 2,000 रुपये से अधिक के सामान्य व्यापारिक यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन के मामले में यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा। नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा।

      हालांकि, सरकार और NPCI के अनुसार यूपीआई से भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं पर सीधे कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) होने वाले यूपीआई लेनदेन भी पहले की तरह नि:शुल्क रहेंगे। वहीं 2,000 रुपये तक के भुगतान पर भी शुल्क नहीं लगेगा।

छोटे कारोबारियों को राहत

      नई व्यवस्था में छोटे कारोबारियों को भी राहत दी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ छोटे व्यापारी निर्धारित सीमा तक यूपीआई क्यूआर के माध्यम से होने वाली आय पर MDR से मुक्त रहेंगे। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ को सीमित करना है।

     इसके अलावा रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कुछ आवश्यक सेवाओं जैसी श्रेणियों के लिए अलग शुल्क संरचना रखी गई है। इन क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के पात्र लेनदेन पर फ्लैट 5 रुपये MDR का प्रावधान किया गया है।

छह साल से अधिक पुरानी शून्य-MDR व्यवस्था में बदलाव

     यूपीआई के जरिए व्यापारिक भुगतान पर शुल्क की यह व्यवस्था जनवरी 2020 से चली आ रही शून्य-MDR व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव है। अब तक यूपीआई को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए व्यापारिक लेनदेन पर MDR नहीं लिया जाता था। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य यूपीआई के बुनियादी ढांचे, तकनीकी क्षमता, साइबर सुरक्षा और दीर्घकालिक स्थायित्व के लिए वित्तीय आधार तैयार करना है।

      सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य यूपीआई को आम उपभोक्ताओं के लिए महंगा बनाना नहीं है। अधिकांश छोटे और सामान्य डिजिटल भुगतान अब भी शुल्क-मुक्त रहेंगे।

कांग्रेस ने उठाया कीमतें बढ़ने का सवाल

      कांग्रेस का कहना है कि भले ही MDR सीधे उपभोक्ता से नहीं वसूला जाएगा, लेकिन यदि व्यापारियों की लेनदेन लागत बढ़ती है तो वे इसकी भरपाई उत्पादों और सेवाओं की कीमत बढ़ाकर कर सकते हैं। राहुल गांधी ने इसी आधार पर आरोप लगाया है कि इसका अप्रत्यक्ष बोझ अंततः आम लोगों को उठाना पड़ सकता है।

      इस मुद्दे ने यूपीआई के भविष्य और डिजिटल भुगतान के कारोबार मॉडल को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकार और NPCI इसे यूपीआई के दीर्घकालिक वित्तीय एवं तकनीकी स्थायित्व से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे आम लोगों और कारोबारियों पर संभावित अतिरिक्त बोझ के रूप में देख रहा है।