रायपुर/आजमगढ़, 16 सितम्बर।उत्तरप्रदेश के महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में स्थापित राहुल सांकृत्यायन शोधपीठ के समन्वयक की जिम्मेदारी प्रोफेसर एम.हसीन खान को सौंपी गई है।
शोधपीठ का उद्देश्य महापंडित राहुल सांकृत्यायन के जीवन, साहित्य, विचार और उनके बहुआयामी व्यक्तित्व पर व्यापक एवं समग्र अध्ययन को प्रोत्साहित करना है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने प्रो. खान को नियुक्ति आदेश प्रदान करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं।
प्रो. एम. हसीन खान वर्तमान में श्री गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मालटारी, आजमगढ़ के हिंदी विभाग में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष हैं। साहित्य और भाषा के क्षेत्र में सक्रिय प्रो. खान की पहचान साहित्यकार, कवि, लेखक और भाषाविद् अध्यापक के रूप में है। राहुल सांकृत्यायन जैसे बहुआयामी साहित्यकार एवं चिंतक पर केंद्रित शोधपीठ की जिम्मेदारी मिलने से विश्वविद्यालय में शोध और साहित्यिक गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
साहित्य, इतिहास और दर्शन के विविध आयामों पर अध्ययन
राहुल सांकृत्यायन हिंदी साहित्य के ऐसे प्रमुख रचनाकार रहे हैं, जिनका योगदान साहित्य के साथ-साथ इतिहास, दर्शन, संस्कृति, यात्रा-वृत्तांत और बौद्ध अध्ययन जैसे विविध क्षेत्रों में रहा। शोधपीठ के माध्यम से उनके साहित्य, विचार और सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोण के विभिन्न पक्षों पर शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे शोधार्थियों और साहित्य के विद्यार्थियों को राहुल सांकृत्यायन के कृतित्व को व्यापक संदर्भ में समझने का अवसर मिलेगा।
स्वर्ण पदक के साथ पूरी की उच्च शिक्षा
प्रो. एम. हसीन खान की प्रारंभिक शिक्षा राजनांदगांव में हुई। उन्होंने शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय, राजनांदगांव से बीए की शिक्षा राधाबल्लभ जानी स्वर्ण पदक के साथ पूरी की। इसके बाद पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर से एमए हिंदी में गोल्ड मेडल हासिल किया। उन्होंने बीएड, नेट और पीएचडी की उपाधियां भी प्राप्त कीं। उच्च शिक्षा के दौरान उन्हें नेशनल स्कॉलरशिप भी मिली।
उत्तर प्रदेश उच्चतर लोक सेवा आयोग के माध्यम से सहायक प्राध्यापक के रूप में चयन के बाद उनकी नियुक्ति आजमगढ़ जिले के श्री गांधी पीजी कॉलेज में हुई। वर्तमान में वे इसी संस्थान के हिंदी विभाग में प्रोफेसर एवं अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।
कई पुस्तकों का हो चुका है प्रकाशन
साहित्य के क्षेत्र में प्रो. खान की कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें ‘तुम युवा हो‘, ‘जमीन पर उतरी कविता‘, ‘काव्य प्रभात‘, ‘समकालीन काव्य परिदृश्य और नागार्जुन का काव्य‘, ‘भारतीय संस्कृति और साकेत का नवम सर्ग‘, ‘साहित्य शास्त्र और हिंदी आलोचना‘, ‘कार्यालयी हिंदी और कंप्यूटर‘तथा ‘आदिकालीन हिंदी काव्य‘प्रमुख हैं।
उनकी साहित्यिक कृतियों में कविता के साथ हिंदी साहित्य, आलोचना, भारतीय संस्कृति और भाषा से जुड़े विषयों पर अध्ययन और विमर्श देखने को मिलता है।
राष्ट्रपति भवन में भी मिला सम्मान
साहित्यिक और सामाजिक गतिविधियों में योगदान के लिए प्रो. खान को विभिन्न अवसरों पर सम्मानित किया जा चुका है। 4 जुलाई 2013 को राष्ट्रीय युवा महोत्सव के अवसर पर उन्हें राष्ट्रपति भवन में अतिथि के रूप में सम्मान प्राप्त हुआ। इसके अलावा 25 जनवरी 2014 को लखनऊ में राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर तत्कालीन राज्यपाल बीएल जोशी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने उन्हें सम्मानित किया।
राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम समन्वयक के रूप में वर्ष 2012 से 2016 तक वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से जुड़े रहते हुए उन्होंने सामाजिक सरोकारों से संबंधित विभिन्न गतिविधियों में भागीदारी की। गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता के उद्देश्य से आयोजित करीब 20 बापू बाजारों में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वर्तमान में प्रो. खान महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में बापू बाजार के समन्वयक की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। अब राहुल सांकृत्यायन शोधपीठ के समन्वयक के रूप में उनके सामने महापंडित राहुल सांकृत्यायन के जीवन, साहित्य और विचारों पर केंद्रित शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।




