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सौरभ चंद्राकर आया, रवि उप्पल और शुभम सोनी कब आएंगे भारत : दीपक बैज

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रायपुर, 04 नवंबर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने महादेव ऑनलाइन सट्टा एप मामले में प्रमोटर सौरभ चंद्राकर को भारत लाए जाने के बाद भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल किया कि सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया है, लेकिन उसके कथित साझेदार रवि उप्पल और शुभम सोनी अब तक कानून की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं? उन्हें भारत कब लाया जाएगा?

     श्री बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान महादेव सट्टा एप मामले को लेकर कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर प्रचार किया और राजनीतिक लाभ उठाया, लेकिन सत्ता में आने के बाद पिछले तीन वर्षों में इस अवैध कारोबार को बंद कराने के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।

     पत्रकार वार्ता में बैज ने कहा कि शुभम सोनी ने विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान जारी एक वीडियो में खुद को महादेव सट्टा एप का मालिक बताते हुए दावा किया था कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल उसके लिए काम करते हैं। भाजपा ने अपने कार्यालय में बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस वीडियो को जारी किया था और इसी के आधार पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार तथा तत्कालीन मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब कांग्रेस का सवाल है कि भाजपा सरकार शुभम सोनी को भारत लाकर पूछताछ क्यों नहीं कर रही है? जिस व्यक्ति के वीडियो को आधार बनाकर भाजपा ने पूरे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश की, उसे अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?

      श्री बैज ने कहा कि सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की कार्रवाई के पीछे कांग्रेस की तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। महादेव सट्टा एप के खिलाफ पहली एफआईआर से लेकर 72 एफआईआर दर्ज करने तक ठोस कार्रवाई कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुई थी। इस दौरान 500 से अधिक जब्ती और गिरफ्तारियां भी की गई थीं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के अनुरोध पर ही महादेव एप को गूगल प्ले स्टोर से हटाया गया था। रायपुर पुलिस की अर्जी पर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया गया था। ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के खिलाफ सख्त कानून बनाने की पहल भी कांग्रेस सरकार ने की थी।

     प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा सरकार से पूछा कि जब महादेव सट्टा एप को लेकर विधानसभा चुनाव से पहले इतना बड़ा राजनीतिक अभियान चलाया गया था, तो अब तीन साल से प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन सरकार होने के बावजूद यह नेटवर्क पूरी तरह बंद क्यों नहीं हुआ? आज भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महादेव सट्टा एप के विज्ञापन दिखाई दे रहे हैं। आखिर इन अवैध गतिविधियों को किसका संरक्षण प्राप्त है?

      कांग्रेस नेता ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग एप का नियमन केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संबंधित केंद्रीय विभागों के दायरे में आता है, लेकिन महादेव सट्टा कांड के तार प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर लॉ कमीशन और प्रसार भारती तक पहुंचने के आरोप सामने आए हैं। इसके बावजूद कथित तौर पर जिम्मेदार बड़े अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है। बैज ने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे प्रभावशाली लोगों के संरक्षण के बिना इतने बड़े नेटवर्क का संचालन संभव नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच की दिशा भटकाकर प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है।

    श्री बैज ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में महादेव सिंडिकेट से जुड़े अनेक ऑनलाइन सट्टा पैनल सक्रिय हुए हैं। इनमें रेड्डी अन्ना, रेड्डी क्लब, FBBET77, CBFTE ऑनलाइन बुक, बेटभाई बुक, फेयरप्ले, सुपरविन, विनबज, जन्नत बुक, महाकाल बुक, राजवीर ऑनलाइन बुक, लोटस 365, लेजर बुक, कोहिनूर बुक, अलीबाबा बुक, खेलोयार, एसडी बुक, लॉयन बुक, स्काईएक्सचेंज और डायमंडएक्स डॉट कॉम सहित कई प्लेटफॉर्म का नाम लिया। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में इस तरह के दर्जनों ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म खुलेआम संचालित हो रहे हैं।

     उन्होंने सरकार से पूछा कि इन प्लेटफॉर्म के खिलाफ अब तक कितनी कार्रवाई की गई है? क्या इस कारोबार को सरकारी संरक्षण दिया जा रहा है? क्या जीएसटी की आड़ में ऐसे अवैध कारोबार को वैधता प्रदान करने की कोशिश की जा रही है? बैज ने विशेष रूप से सवाल उठाया कि हीरेन जोशी को कौन बचा रहा है और कथित प्रभावशाली लोगों के खिलाफ जांच आगे क्यों नहीं बढ़ रही है?

     कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जब सोशल मीडिया पर महादेव और अन्य ऑनलाइन सट्टा एवं गेमिंग एप के विज्ञापन खुलेआम प्रसारित हो रहे हैं, तो केंद्र का आईटी विभाग और राज्य का गृह एवं वित्त विभाग कार्रवाई करने में असमर्थ क्यों दिखाई दे रहे हैं? उन्होंने 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कथित आर्थिक लेनदेन और टैक्स संबंधी सवालों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि इस पूरे नेटवर्क में बड़े स्तर पर आर्थिक हित और राजनीतिक संरक्षण की भूमिका की जांच होनी चाहिए।