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संविधान प्रदत्त नागरिक अधिकारों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी – भूपेश

जगदलपुर 26 जनवरी।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि देश की एकता, अखण्डता के साथ प्रदेश में संविधान प्रदत्त नागरिक अधिकारों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। समाज के किसी भी वर्ग पर यदि कहीं से कोई भी संकट आता है तो हमारी सरकार उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी मिलेगी।

श्री बघेल ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर लालबाग मैदान में ध्वजारोहण के बाद प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि देश की एकता, अखण्डता के साथ प्रदेश में संविधान प्रदत्त नागरिक अधिकारों की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है। समाज के किसी भी वर्ग पर यदि कहीं से कोई भी संकट आता है तो हमारी सरकार उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी मिलेगी।

उन्होने कहा कि किसानों, ग्रामीणों तथा आम जनता का सबसे बड़ा संरक्षक हमारा संविधान है, लेकिन अगर कोई नया कानून इस व्यवस्था में आड़े आता है तो ऐसी चुनौती से निपटना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, जिसे हमने छत्तीसगढ़ कृषि उपज मण्डी (संशोधन) विधेयक के माध्यम से निभाया।हमारी सरकार ने बीते दो वर्षों में विशेषकर जरूरतमंद तबकों के हक और हित में बड़े कदम उठाए हैं। गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की बहुतायत को देखते हुए, उन्हें राष्ट्रीय औसत के बराबर लाने की चुनौती स्वीकार की।किसानों, ग्रामीणों, भूमिहीनों के साथ आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को न्याय दिलाने का वादा पूरा करने के लिए हम हर चुनौती का सामना करने को तैयार हैं।

श्री बघेल ने कहा कि हमारी सरकार ने बीते दो वर्षों में गरूबी रेखा के नीचे के परिवारों के हक और हित में बड़े कदम उठाए हैं। गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की बहुतायत को देखते हुए तथा उन्हें राष्ट्रीय औसत के बराबर लाने की चुनौती स्वीकार करते हुए हमने पूना माड़ाकाल दंतेवाड़ा कार्यक्रम शुरू किया, जो ऐसे अन्य जिलों में भी तेज विकास के लिए नवाचार का आधार बनेगा। इस अभियान से दंतेवाड़ा जिले में 10 माह में कुपोषण की दर 26 प्रतिशत कम हुई।

उन्होने कहा कि हमारी सरकार ने आगामी पांच वर्षों में जल संसाधनों के विकास की जो रणनीति बनाई है, उसमें बोधघाट परियोजना का अहम योगदान होगा। यह परियोजना न सिर्फ बस्तर की जीवन-रेखा इंद्रावती को नवजीवन देगी, बल्कि मुआवजा तथा पुनर्वास पैकेज के निर्धारण के नए कीर्तिमान भी रचेगी। इसमें प्रभावित क्षेत्र के निवासियों की सहमति तथा भागीदारी की निर्णायक भूमिका होगी।

श्री बघेल ने कहा कि आदिवासी अंचलों में स्थानीय नेतृत्व को सम्मान और अधिकार देने के लिए हमने बस्तर, सरगुजा तथा मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरणों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की नियुक्ति भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों से की है और उन्हें क्षेत्रीय विकास के निर्णय लेने हेतु व्यापक अधिकार दिए हैं। सरकार की सेवाएं जनता के निकट ले जाने के लिए हमने गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिला तथा 24 नई तहसीलों का गठन भी किया। इस प्रकार क्षेत्रीय असंतुलन समाप्त करने तथा प्रदेश के सर्वांगीण विकास में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग के साथ ही ऐसे क्षेत्रों को तवज्जो दी गई है, जो अब तक उपेक्षा के शिकार थे।