
रायपुर, 14 फरवरी। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार रंजीत भट्टाचार्य का उनके गृह नगर धमतरी में निधन हो गया। उन्होंने जीवनकाल में ही नेत्रदान और देहदान का संकल्प लिया था। मरणोपरांत उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए परिजनों ने पार्थिव शरीर रायपुर स्थित मेडिकल कॉलेज को सौंप दिया। उनके इस निर्णय को समाज के लिए प्रेरणादायक कदम माना जा रहा है।
रंजीत भट्टाचार्य धमतरी जिला हिन्दी साहित्य समिति के पूर्व अध्यक्ष रह चुके थे और लगभग पाँच दशकों तक साहित्य एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। वे हिंदी की नई कविता और ग़ज़ल लेखन में अपने प्रयोगधर्मी अंदाज़ के लिए विशेष रूप से पहचाने जाते थे। उनकी अतुकांत कविताओं का संग्रह ‘पाँव बने हाथ’ वर्ष 1987 में प्रकाशित हुआ था, जिसने साहित्य जगत में अलग पहचान बनाई। इसके अलावा उनकी हिंदी ग़ज़लों का संकलन ‘दुबला-पतला चाँद’ भी काफी चर्चित रहा। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र की पृष्ठभूमि पर आधारित उनका विज्ञान-उपन्यास ‘अबूझमाड़ का अतिथि’ भी प्रकाशित हो चुका है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने अपने मित्र रामबिलास अग्रवाल के साथ मिलकर वर्ष 1977-78 में धमतरी से साप्ताहिक ‘अपना मोर्चा’ का संपादन और प्रकाशन प्रारंभ किया, जो लगभग एक दशक तक प्रकाशित होता रहा। इसके अलावा धमतरी के दैनिक ‘प्रखर समाचार’ के कई दीपावली विशेषांकों में उन्होंने संपादन सहयोगी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे रायपुर से प्रकाशित दैनिक ‘हरिभूमि’ के धमतरी संस्करण से भी संपादन सहयोगी के रूप में जुड़े रहे।
उनके साथ कार्य कर चुके पत्रकार उन्हें परिश्रमी, अनुशासनप्रिय और प्रेरक संपादक के रूप में याद करते हैं। धमतरी जिला साहित्य समिति के अध्यक्ष डुमनलाल ध्रुव सहित समिति के सभी पदाधिकारियों, पत्रकारों और प्रबुद्ध नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। आयोजित शोकसभा में साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके दीर्घकालीन योगदान को स्मरण किया गया।
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