स्वदेशी कोयले से सिनगैस बनाना जिंदल स्टील की बड़ी उपलब्धि

रायपुर, 6 अप्रैल। देश की प्रमुख स्टील निर्माता कंपनी जिंदल स्टील एंड पावर (Jindal Steel) ने उन्नत कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के जरिए स्वदेशी कोयले के उपयोग में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस नवाचार के माध्यम से कंपनी ने न केवल कम कार्बन उत्सर्जन वाला स्टील उत्पादन संभव बनाया है, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूत आधार दिया है।
कंपनी ने वैश्विक स्तर पर पहली बार ऐसी तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया है, जिसमें घरेलू कोयले को गैसीफाई कर ‘सिनगैस’ तैयार की जाती है और उसी से डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) का उत्पादन किया जाता है। इसका सीधा अर्थ है कि अब स्टील निर्माण में विदेशी गैस या महंगे आयातित कोयले पर निर्भरता कम हो रही है और देशी संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव हो पाया है।
ऊर्जा संकट और ईंधन की कमी से निपटने के लिए जिंदल स्टील ने गैल्वनाइजिंग और कलर कोटिंग लाइन की भट्टियों में भी सिनगैस का सफल उपयोग किया है। स्टील उद्योग में इस तरह का प्रयोग पहली बार किया गया है, जो वर्तमान परिस्थितियों में ईंधन विकल्प के रूप में बेहद कारगर साबित हो रहा है।
कंपनी ने एक और अहम कदम उठाते हुए सिनगैस के जरिए ब्लास्ट फर्नेस संचालन की दिशा में भी सफलता हासिल की है। इससे आयातित कोकिंग कोल पर निर्भरता में कमी आई है और प्रति टन स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन को उल्लेखनीय रूप से घटाने में मदद मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टील उत्पादन की पूरी वैल्यू चेन में सिनगैस का उपयोग ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरणीय संतुलन के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
गौरतलब है कि भारत सरकार भी कोयला गैसीफिकेशन को बढ़ावा देने के लिए ‘राष्ट्रीय कोयला गैसीफिकेशन मिशन’ चला रही है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में इस तकनीक को उद्योगों में तेजी से अपनाया जाएगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।
इस विषय पर जिंदल स्टील, अंगुल के कार्यकारी निदेशक पी.के. बीजू नायर ने कहा कि स्वदेशी कोयले से तैयार सिनगैस भविष्य में महंगे आयातित ईंधनों जैसे मेथनॉल, अमोनिया और एलएनजी का विकल्प बन सकती है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि यदि कोयला गैसीफिकेशन के साथ कार्बन कैप्चर, उपयोग एवं भंडारण (CCUS) तकनीक को अपनाया जाए, तो प्रदूषण में कमी के साथ भारत अंतरराष्ट्रीय मानकों जैसे CBAM पर भी खरा उतर सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में भारतीय स्टील की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
स्वदेशी संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्वच्छ तकनीक के समावेश के साथ जिंदल स्टील का यह प्रयास ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक मजबूत और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।




