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डॉ राजाराम त्रिपाठी को सर्टिफिकेट आफ एक्सीलेंस का सम्मान

कोंडागांव 15 जून।एग्रीकल्चर मीडिया हाउस कृषि जागरण और कृषि विज्ञान केन्द्र, कोंडागांव के सयुक्त तत्वाधान में कृषि विज्ञान केन्द्र, कोंडागांव में आयोजित किसान उत्सव में सांसद भोजराज नाग तथा विधायक नीलकंठ टेकाम ने अपने कर कमलों से डॉ राजाराम त्रिपाठी को सर्टिफिकेट आप एक्सीलेंस प्रदान किया।

   कृषि जागरण द्वारा आयोजित और महिंद्रा ट्रैक्टर्स एवं एसीई कंपनी द्वारा प्रायोजित इस समृद्ध किसान उत्सव के मुख्य अतिथि सांसद लोकसभा क्षेत्र कांकेर भोजराज नाग तथा अध्यक्षता विधायक नीलकंठ टेकाम ने की। वही इस कार्यक्रम में विशिष्ट-अतिथि के तौर पर कृषि-जागरण की पहल ‘मिलेनियर फार्मर ऑफ इंडिया’ (एमएफओआई) अवार्ड के ब्रांड अम्बेसडर और एमएफओआई अवार्ड-2023 में ‘रिचेस्ट फार्मर ऑफ इंडिया’ (आरएफओआई) के पहले अवार्ड से सम्मानित डॉ. राजाराम त्रिपाठी शामिल हुए।

   कार्यक्रम के दौरान भोजराज नाग ने अपने उद्बोधन में कहा कि जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीज दाल, रोटी और चावल है जिसके बिना जीवन यापन करना मुश्किल है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के बारे में बात करते हुए कहा कि पर्यावरण को संरक्षित रखना बहुत जरुरी है जिसके लिए सभी से पेड़ लगाने की अपील की। विधायक नीलकंठ टेकाम ने कहा कि कृषि विज्ञान केन्द्र, पूर्वी बोरगांव, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में आधुनिक तकनीक से खेती कर ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। किसान अन्नदाता के रूप में इस संसार का पालनहार है इनका हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने आगे कहा बस्तर के बेहद पिछड़े क्षेत्र में जन्मे और बेहद कठिनाइयों में भी लगातार पढ़ाई कर खेती के क्षेत्र में डॉ राजाराम त्रिपाठी ने बस्तर का नाम जिस तरह से सारे देश तथा विदेशों में रोशन किया है उस पर  बस्तर को गर्व है।

   इस दौरान हरित-योद्धा, कृषि-ऋषि, हर्बल-किंग, फादर ऑफ सफेद मूसली आदि नामों से देशभर में अपनी पहचान बना चुके सफल किसान डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने उपस्थित सैकड़ो प्रगतिशील किसानों को उनकी अपनी आंचलिक बोली में अपना उद्बोधन दिया। इस दौरान उन्होंने अपनी सफलता की कहानी साझा करते हुए कहा कि अब समूह में खेती करना बहुत जरुरी है। इससे ज्यादा मुनाफा होता है। साथ ही मार्केटिंग करना भी आसान होता है। आगे उन्होंने बताया कि इस डिजिटल युग में मोबाइल, वैज्ञानिकी सलाह और कृषि जागरण जैसे बहुभाषी पत्रिका आदि के माध्यम से भी खेती करने की तरीको में बदलाव किया जा सकता है।

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