
रायपुर, 5 फरवरी।राजधानी रायपुर के समीप धरसींवा स्थित पं. श्यामाचरण शुक्ल शासकीय महाविद्यालय में गुरुवार को नवगीत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर “हिंदी साहित्य में नवगीत काव्य-परंपरा” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता रेल मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य एवं छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध भाषाविज्ञानी डॉ. चित्तरंजन कर रहे। अध्यक्षता केन्द्रीय हिंदी सलाहकार समिति तथा कौशल विकास एवं उद्यमिता विकास मंत्रालय के सदस्य और छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नवगीतकार डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने की।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पूजा-अर्चना के साथ हुआ। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य कौशल किशोर तथा हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सी.एल. साहू ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं श्रीफल भेंट कर स्वागत किया।
स्वागत उद्बोधन में डॉ. सी.एल. साहू ने हिंदी भाषा के उन्नयन एवं विकास के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों और आगामी कार्ययोजना की जानकारी दी। वहीं प्रभारी प्राचार्य कौशल किशोर ने नवगीत दिवस के आयोजन की पृष्ठभूमि और उसके साहित्यिक महत्व पर अपने विचार साझा किए।
मुख्य वक्ता डॉ. चित्तरंजन कर ने अपने सारगर्भित व्याख्यान में भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपनी मातृभाषा को ठीक से नहीं जानता, वह किसी अन्य भाषा को भी सही ढंग से नहीं सीख सकता। उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्तित्व का निर्माण साधनों से नहीं, बल्कि साधना से होता है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने गीत और नवगीत की विकास यात्रा, उसके बुनियादी तत्वों और शिल्प पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने नवगीत को परिभाषित करते हुए कहा कि संश्लिष्ट और जटिल भावों तथा आधुनिक विचारों को संवेदना में ढालकर, शब्दों में तौलकर नए अर्थ और नए मुहावरे गढ़ने की प्रवृत्ति ही नवगीत है। उन्होंने यह भी कहा कि नवगीत गीत-परंपरा का वर्तमान स्वरूप है, जिसमें समकालीन जीवन का कटु यथार्थ स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. प्रशांत रथ, डॉ. सुषमा मिश्रा सहित विभिन्न संकायों के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रीति पांडेय ने किया।
CG News | Chhattisgarh News Hindi News Updates from Chattisgarh for India