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रोजगार और बुनियादी ढांचे पर जोर, 12 लाख करोड़ से अधिक पूंजीगत व्यय का प्रावधान – वित्त मंत्री

नई दिल्ली, 11 फरवरी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में केंद्रीय बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को गति देने के लिए श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण के माध्यम से व्यापक स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं।

   वित्त मंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के बजट में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के लिए 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। यह राशि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.1 प्रतिशत है और वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 11.5 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने कहा कि यह निवेश देश के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने और अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

   रोजगार सृजन को लेकर विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए सीतारमण ने कहा कि पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों की स्थापना से मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और नए रोजगार पैदा होंगे। इसके अलावा एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) क्षेत्र को भी सरकार प्रोत्साहित कर रही है, जो आने वाले समय में युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर अवसर उपलब्ध कराएगा।

  राज्यों को कर हस्तांतरण में कटौती के आरोपों पर उन्होंने कहा कि इस वर्ष राज्यों को 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाज्य कर निधि का 41 प्रतिशत राज्यों को दिया जा रहा है और किसी भी राज्य के हिस्से में कमी नहीं की गई है।

  ऋण प्रवाह के मुद्दे पर वित्त मंत्री ने कहा कि एमएसएमई सहित उद्योगों के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है और वित्तीय प्रणाली में संसाधनों की कोई कमी नहीं है। उपकर और अधिभार के संबंध में उन्होंने कहा कि ये राशि स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसे विशिष्ट उद्देश्यों के लिए केंद्र द्वारा एकत्र की जाती है और इसे राज्यों में ही व्यय किया जाता है।

   महंगाई के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार के कार्यकाल में मुद्रास्फीति दर में उल्लेखनीय कमी आई है, जबकि यूपीए शासन के दौरान यह दो अंकों में थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने किसानों के हितों से समझौता किया और विश्व व्यापार संगठन के समक्ष कमजोर रुख अपनाया। साथ ही, शर्म अल-शेख संयुक्त बयान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय भारत की संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समझौता किया गया था।

  वित्त मंत्री ने दोहराया कि मौजूदा सरकार देशहित को सर्वोपरि रखते हुए विकास और समावेशी प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है।