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पत्रकारों पर सत्य और विश्वसनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी – राज्यपाल डेका

रायपुर, 29 मार्च। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि लोकतंत्र में व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बाद पत्रकारिता को चौथा स्तंभ माना जाता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि पत्रकारिता महज एक पेशा नहीं, बल्कि एक मिशन और साधना है, जो समाज को दिशा देने का कार्य करती है।

   राज्यपाल श्री डेका भिलाई सेक्टर-4 स्थित एस.एन.जी. ऑडिटोरियम में आयोजित छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के प्रादेशिक पत्रकार सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने उत्कृष्ट कार्य करने वाले पत्रकारों को सम्मानित किया।

   उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को समाज का दर्पण कहा जाता है, क्योंकि यह जनता और शासन के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाती है। इसके माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाता है और जनहित के मुद्दों को सामने लाया जाता है।

   इस अवसर पर महिला पत्रकारों की उल्लेखनीय उपलब्धियों को सराहते हुए शगुफ्ता शीरीन, अनुभूति भाखरे, कोमल धनेसर और साक्षी सोनी को सम्मानित किया गया। साथ ही समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय साधना चतुर्वेदी, अंजना श्रीवास्तव, लता बौद्ध, दीप्ति सिंह और सुनीता जैन को भी प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

   राज्यपाल ने वर्तमान समय में पत्रकारिता के सामने खड़ी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के तेजी से विस्तार ने सूचना के प्रवाह को जहां लोकतांत्रिक बनाया है, वहीं इसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए हैं। फेसबुक, व्हाट्सएप और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए बिना सत्यापन के खबरें तेजी से फैल रही हैं, जिससे ‘फेक न्यूज’ और ‘डीपफेक’ जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं।

  उन्होंने यह भी कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद प्रिंट मीडिया ने अपनी विश्वसनीयता को काफी हद तक बनाए रखा है। ऐसी चुनौतियों का सामना करने के लिए पत्रकारों को अपने मूल सिद्धांतों और आदर्शों की ओर लौटना होगा।

कार्यक्रम में ईश्वर दुबे, सतीश बौद्ध, राजाराम त्रिपाठी, संजय त्रिवेदी और वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पंकज सहित बड़ी संख्या में पत्रकार एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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