सक्ती वेदांता पावर प्लांट हादसा: कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने सुरक्षा लापरवाही पर सरकार को घेरा

रायपुर, 16 अप्रैल।छत्तीसगढ़ के सक्ती स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुई दुर्घटना के बाद प्रदेश कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मौके पर पहुंचा और प्रभावितों से मुलाकात कर हालात का जायजा लिया। यह प्रतिनिधिमंडल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के नेतृत्व में गया।
प्रतिनिधिमंडल में वेदांता पावर दुर्घटना की जांच के लिए गठित कांग्रेस समिति के संयोजक जयसिंह अग्रवाल के साथ पूर्व मंत्री उमेश पटेल, नोबेल वर्मा, विधायक रामकुमार यादव, उत्तरी जांगड़े, अटल श्रीवास्तव, बालेश्वर साहू, राघवेन्द्र सिंह, व्यास कश्यप, शेषराज हरवंश, जिला अध्यक्ष रश्मि गबेल और राजेश अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे।
दौरे के दौरान कांग्रेस नेताओं ने दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया और घायलों व मृतकों के परिजनों से मिलकर उनकी स्थिति जानी। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य में लगातार हो रही औद्योगिक दुर्घटनाओं को गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि यह केवल दुर्घटनाएं नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी का परिणाम हैं। उन्होंने इसे “सदोष मानव वध” तक करार देते हुए कहा कि पिछले ढाई वर्षों में औद्योगिक हादसों में करीब 300 श्रमिकों की मौत हो चुकी है, जो बेहद चिंताजनक है।
बैज ने घटना के लिए संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी तय कर तत्काल आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार हर बार उद्योग प्रबंधन को बचाने का काम करती है, जिसके कारण ऐसी घटनाएं बार-बार दोहराई जाती हैं। उन्होंने मांग की कि मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये और घायलों को 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, साथ ही घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी राज्य की औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार में मजदूरों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई जगहों पर भट्टी बंद किए बिना ही काम कराया जा रहा है, सुरक्षा उपकरणों की कमी है और बिना उचित अनुमति के जोखिमपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। यह स्थिति सुरक्षा तंत्र की गंभीर विफलता को दर्शाती है।
महंत ने कहा कि कांग्रेस लगातार औद्योगिक क्षेत्रों में व्याप्त अव्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाती रही है, लेकिन सरकार इस ओर ध्यान देने के बजाय आंख मूंदे बैठी है। उन्होंने प्रदेश के सभी उद्योगों में व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने और निर्धारित मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की मांग की।



