एमपी से मिलने वाली राशि का उपयोग करें लंबित डीआर एरियर्स में- पेंशनर्स महासंघ

रायपुर, 16 अप्रैल। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच लंबित लगभग 10,500 करोड़ रुपये की राशि की वसूली को लेकर छत्तीसगढ़ के पेंशनरों ने अपनी मांगों को तेज कर दिया है।राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ इकाई ने स्पष्ट किया है कि यह राशि मूल रूप से पेंशनरों के अधिकार से जुड़ी है, इसलिए इसका उपयोग प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
महासंघ ने सरकार से मांग की है कि मध्यप्रदेश से अब तक प्राप्त 2000 करोड़ रुपये का उपयोग तुरंत पेंशनरों को महंगाई राहत (डीआर) के एरियर भुगतान के लिए किया जाए। साथ ही, 88 माह से लंबित डीआर के बकाया का अंतरिम भुगतान भी शीघ्र किया जाए। संगठन ने यह भी कहा कि शेष राशि की वसूली की प्रक्रिया तेज की जाए, ताकि पेंशनरों को उनका पूरा अधिकार जल्द मिल सके।
महासंघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव, कार्यकारी प्रांताध्यक्ष जे.पी. मिश्रा, प्रदेश महामंत्री प्रवीण कुमार त्रिवेदी सहित अन्य पदाधिकारियों ने जारी बयान में कहा कि बढ़ती महंगाई के कारण पेंशनरों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। ऐसे में वर्षों से लंबित डीआर एरियर्स का भुगतान न होना गंभीर चिंता का विषय है। उनका कहना है कि यदि वसूली गई राशि का उपयोग पेंशनरों के हित में किया जाए, तो लाखों वरिष्ठ नागरिकों को सीधे राहत मिल सकती है।
संगठन ने इस पूरे मामले में हुई चूक के लिए केवल बैंक को जिम्मेदार ठहराने पर भी सवाल उठाए हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कर वास्तविक दोषियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो।
महासंघ ने यह भी बताया कि वह वर्ष 2018-19 से लगातार इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाता रहा है, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब जब मामला सामने आ चुका है, तो सरकार को पारदर्शिता के साथ कार्रवाई करते हुए पेंशनरों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
महासंघ के अन्य पदाधिकारियों, जिनमें महामंत्री अनिल गोल्हानी, संगठन मंत्री टी.पी. सिंह, संभागीय अध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार सिन्हा और रायपुर जिला अध्यक्ष आर.जी. बोहरे शामिल हैं, ने भी सरकार से अपील की है कि मध्यप्रदेश से मिलने वाली शेष राशि की जल्द वसूली सुनिश्चित कर उसे 88 माह के लंबित डीआर एरियर भुगतान में उपयोग किया जाए, ताकि पेंशनरों को उनका वास्तविक हक मिल सके।




