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अमेरिका में डेमोक्रेट्स को मिल सकती हैं 4 अतिरिक्त सीटें, रिपब्लिकन खेमे में हलचल

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एक तरफ जहां भारत में दक्षिणी राज्यों और कुछ उत्तरी राज्यों के बीच परिसीमन को लेकर तीखी बहस चल रही है, वहीं अमेरिका में भी निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन को लेकर एक ऐसा ही विवाद गहरा रहा है, जिससे रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच का विभाजन और भी साफ होता जा रहा है।

वर्जीनिया के मतदाताओं ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण जनमत संग्रह को मामूली अंतर से मंजूरी दे दी। इससे डेमोक्रेट्स को और भी मजबूती मिल गई है। इस मंजूरी से डेमोक्रेट्स की 6-5 की बढ़त 10-1 की बहुमत में बदल गई। इससे पहले रिपब्लिकन ने टेक्सस में ऐसा करने की कोशिश की थी, जिसका डेमोक्रेट्स ने विरोध किया था।

मैसाचुसेट्स के गवर्नर ने पैक और क्रैक का खेल बताया
इस बदलाव को लेकर मैसाचुसेट्स के गवर्नर एलब्रिज गेरी ने बताया कि, एक जिले (भारतीय भाषा में निर्वाचन क्षेत्र) को इस तरह से “पैक और क्रैक” किया गया है, ताकि उनके विरोधियों के अतिरिक्त वोट खराब हो जाएं। जबकि समर्थकों को उन जिलों में इकट्ठा कर दिया गया, जहां वे आसानी से जीत सकते थे।

इस तरह से विपक्षी मतदाताओं को कुछ जिलों में इकट्ठा करके (पैकिंग) या उन्हें कई जिलों में फैलाकर (क्रैकिंग) करके, वे एक भी वोट बिना बदले चुनावी मैदान को अपने पक्ष में झुका सकते है। गेरी ने आगे बताया कि, चुनावी सीमाओं को नेता इतनी चतुराई से बदलने का काम करते है कि, वे उनके विपरीत कभी न चलें। सरल शब्दों में अगर बताया जाए तो, कल्पना कीजिए कि अगर एक क्रिकेट कप्तान मैच के बीच में टीम की बल्लेबाजी या गेंदबाजी की ताकत के अनुसार, बाउंड्री रस्सियों को फिर से बदल सके। तो मैच का परिणाम क्या होगा, वहीं हाल यहां भी है।

ट्रंप ने इस नए मानचित्र को बनाने की शुरूआत की थी
मानचित्र बनाने की इस नवीनतम सनक की शुरुआत राष्ट्रपति ट्रंप ने ही की है। पिछले साल, ट्रंप के आग्रह पर, टेक्सस के रिपब्लिकनों ने रिपब्लिकन सीटों को मजबूत करने के लिए आक्रामक रूप से अपने मानचित्रों को फिर से बनाया। डेमोक्रेट्स को जल्द ही एहसास हो गया कि चाकू की लड़ाई में फूलों का गुलदस्ता ले जाना हारने की रणनीति थी।

कैलिफोर्निया, जो एक डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ है, वहां उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त को और मजबूत करने का प्रयास किया। इसके बाद वर्जीनिया, जिसके 11 जिले 6-5 के अनुपात में डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में झुके हुए हैं, उन्होंने वहां भी यही राह अपनाई और कुछ चतुराई पूर्ण तरीकों के जरिए राज्य को 10-1 के बहुमत वाले राज्य में बदल दिया।

ट्रंप, जो कभी भी विवाद से पीछे नहीं हटते और न ही किसी हार को चुपचाप सहते हैं। उन्होंने मतदान की पूर्व संध्या पर वर्जीनिया के लोगों से (ईरान संकट के बीच) “बस ना में वोट दें” की अपील की। जब “हां” वोटों ने मात्र 3% के मामूली अंतर से जीत हासिल की, तो उनकी प्रतिक्रिया हमेशा की तरह आक्रामक रही। ईरान को लेकर गुस्से में रहने के दौरान उन्होंने डेमोक्रेट्स, पवन ऊर्जा संयंत्रों और सुप्रीम कोर्ट पर जमकर हमला बोला।

वर्जीनिया में होने वाले चुनाव अहम
अब वर्जीनिया में हुए परिसीमन का नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों पर गहरा असर पड़ेगा। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन बहुमत फिलहाल 217-214 के मामूली अंतर से है। वर्जीनिया में चार सीटें जीतकर (6-5 के बजाय 10-1) और टेक्सस में रिपब्लिकन पार्टी की बढ़त को बेअसर करके, डेमोक्रेट अचानक प्रतिनिधि सभा जीतने के बेहद करीब पहुंच गए हैं। ट्रंप के लिए प्रतिनिधि सभा हारना महज एक झटका नहीं होगा, बल्कि यह एक दुख से भरी हार होगी।