रायपुर, 17 अगस्त। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया है कि स्कूल खुले करीब दो महीने हो चुके हैं, लेकिन प्रदेश के कई स्कूल अब भी शिक्षकों, पुस्तकों और मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव प्रदेश में किसी भी स्कूल के शिक्षक विहीन नहीं होने का दावा करते हैं, जबकि धमतरी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बारना और बालोद के नवीन प्राथमिक शाला शिकारी टोला के विद्यार्थियों ने बारिश में भीगकर शिक्षक की मांग कर सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए हैं।
ठाकुर ने आज यहां जारी बयान में कहा कि छात्र पढ़ना चाहते हैं, लेकिन कई स्कूलों में उन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं। कहीं हिंदी, तो कहीं अंग्रेजी, रसायन, सामाजिक विज्ञान और भूगोल के शिक्षक नहीं हैं। प्राथमिक स्कूल भी शिक्षकों की कमी से प्रभावित हैं। ऐसे में सरकार को बताना चाहिए कि बिना शिक्षकों के स्कूलों में पढ़ाई कैसे हो रही है।
उन्होंने कहा कि तिमाही परीक्षा की समय-सारणी जारी हो चुकी है और बच्चे परीक्षा को लेकर तनाव में हैं। जिन विषयों की पढ़ाई नहीं हुई, उनकी परीक्षा छात्र कैसे देंगे? उन्होंने कहा कि बिना तैयारी परीक्षा देने से यदि परिणाम खराब होते हैं और बच्चों का मनोबल प्रभावित होता है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी होगी।
कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि एक ओर स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार शिक्षकों के तबादले कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की अव्यवस्थित नीति का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है और पालक बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
ठाकुर ने कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में 57 हजार शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था। सरकार बनने के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने 33 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की थी। इसके बाद वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में 20 हजार शिक्षकों की भर्ती की बात कही। मुख्यमंत्री ने भी 5 हजार शिक्षकों की भर्ती की घोषणा की, लेकिन कांग्रेस के अनुसार इन घोषणाओं के अनुरूप भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि एक ओर 57 हजार शिक्षकों की भर्ती का वादा किया गया और दूसरी ओर स्कूलों में आज भी शिक्षकों की कमी बनी हुई है। यह सरकार की शिक्षा नीति की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।
ठाकुर ने कहा कि जेन जी और अल्फा पीढ़ी के विद्यार्थी बारिश में भीगकर शिक्षा का अधिकार मांग रहे हैं। सरकार को उनकी आवाज सुनकर स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।




