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मल्लिकार्जुन खरगे ने विरोध मार्च रोके जाने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा…

विपक्ष ने अदाणी मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति की मांग को लेकर संसद के साथ ही सड़क पर उतरकर सरकार से आर-पार की सियासी लड़ाई के इरादे साफ कर दिए हैं।
राहुल गांधी के लंदन में दिए बयान पर सांसद में सत्ता पक्ष के संग्राम में अदाणी मुद्दे की आंच धीमी न पड़ जाए इसके मद्देनजर विपक्षी दलों के सांसदों ने भी रणनीति बदलते हुए बुधवार को संसद से ईडी दफ्तर तक मार्च निकालने की कोशिश की।

विपक्षी दलों ने ED को लिखा पत्र

बता दें कि पुलिस की भारी नाकेबंदी के चलते विपक्षी सांसदों का मार्च विजय चौक से आगे निकल नहीं पाया तब 18 विपक्षी दलों के नेताओं ने ईडी को ई-मेल से शिकायती पत्र भेज अदाणी समूह के शेयरों की कीमतों में हेरफेर की जांच की मांग की। विपक्षी नेताओं ने ईडी को भेजे इस पत्र में अपने अदाणी समूह पर कथिततौर पर शेल कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग और कई अन्य अनियमितता के आरोप लगाते हुए ईडी निदेशक से इसकी जांच शुरू करने का अनुरोध किया है।

TMC ने चुनी अपनी अलग राह

मल्लिकार्जुन खरगे ने विरोध मार्च रोके जाने के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि विपक्षी सांसदों को अदाणी मामले की व्यापक जांच कराने की शिकायत दर्ज कराने से रोका जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस पहले से ही अदाणी मुद्दे पर अपनी अलग राह पर चल है, मगर विपक्ष के इस मार्च में एनसीपी के सांसद शामिल नहीं हुए।

ED को लिखे संयुक्त पत्र में इन दलों ने किए हस्ताक्षर

अदाणी समूह पर लगे आरोपों की जांच के लिए लिखे विपक्षी नेताओं के संयुक्त पत्र में नेता विपक्ष खरगे के अलावा भाकपा, माकपा, जदयू, शिवसेना (यूबीटी), राजद, द्रमुक, झामुमो, आईयूएमएल, वीसीके, केरल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी आदि दलों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्षी नेताओं ने ईडी प्रमुख से कहा है कि ईडी अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता। हम अच्छी तरह वाकिफ हैं कि कैसे हाल के दिनों में ईडी ने भी कथित राजनीतिक पक्षपात के मामलों को उत्साहपूर्वक आगे बढ़ाया है। अदाणी मामले में सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति का हवाला देते हुए पत्र में कहा गया है कि इसके जांच का दायरा सीमित है, इसलिए हम ईडी को इंगित कर रहे कि वह ऐसे अन्य आधारों पर अपने अधिकार क्षेत्र को न ही बदल सकता है और न हीं छोड़ सकता है। अदाणी समूह से जुड़ी शिकायतों का हवाला देते हुए पत्र में आरोप लगाया गया है कि पिछले तीन महीनों में इस समूह के खिलाफ कई महत्वपूर्ण साक्ष्य उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन अपनी दृढ़ता और निष्पक्षता के दावों के अनुरूप ईडी ने इन गंभीर आरोपों की प्रारंभिक जांच भी अभी शुरू नहीं की है।