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उत्तराखंड: राज्यसभा सांसद के लिए महेंद्र भट्ट ने किया नामांकन

राज्यसभा सांसद रहे अनिल बलूनी का छह साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद राज्यसभा की सीट खाली हो गई थी। इस सीट पर 27 फरवरी को चुनाव होना है, जिसके लिए आज भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट अपना नामांकन दाखिल किया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने आज बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम की मौजूदगी में राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। विधानसभा परिसर में पूर्ण होने वाली इस प्रक्रिया के लिए भट्ट ने सभी औपचारिकताओं को पूरा किया।

इसके बाद उन्होंने नामांकन पत्र चुनाव अधिकारी को सौंपा। इस दौरान मंत्री, सभी विधायक, प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार समेत पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। चौंकाने के लिए मशहूर भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के एक और फैसले से उत्तराखंड भाजपा सरप्राइज हुई थी। सीएम धामी ने इस दौरान कहा कि हम अपने केंद्रीय नेतृत्व का और प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हैं कि सामान्य स्थितियों में जिनका विकास हुआ है ऐसे व्यक्ति को राज्य सभा के लिए मनोनीत किया गया है। ये हमारे लिए गौरव का क्षण है कि सीमांत क्षेत्र चमोली के व्यक्ति को पार्टी ने मौका दिया है। पार्टी के कार्यकर्ताओं में खुशी है।

महेंद्र भट्ट को उम्मीदवार बनाए जाने के सियासी मायने
पार्टी ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया है। राज्यसभा सांसद रहे अनिल बलूनी का छह साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद राज्यसभा की सीट खाली हो गई थी। इस सीट पर 27 फरवरी को चुनाव होना है।

लोकसभा चुनाव से पहले महेंद्र भट्ट को उम्मीदवार बनाए जाने के सियासी मायने हैं। भट्ट ब्राह्मण चेहरा हैं और भाजपा केंद्रीय नेतृत्व का उन्हें राज्यसभा में भेजे जाने के फैसले को जातीय समीकरणों में संतुलन साधने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। जब तक भाजपा नेतृत्व ने राज्यसभा का टिकट तय नहीं किया था, तब संभावना अनिल बलूनी को रिपीट किए जाने की भी मानी जा रही थी।

केंद्रीय संगठन में बलूनी लंबे समय से राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। अब उन्हें भी पौड़ी गढ़वाल लोकसभा सीट का एक दावेदार माना जा रहा है। सियासी जानकारों का मानना है कि ऐसी अटकलों के बीच महेंद्र भट्ट को प्रत्याशी बनाकर पार्टी ने अपने कैडर को सम्मान दिए जाने का संदेश देने की कोशिश की है। साथ ही प्रदेश कैबिनेट में प्रतिनिधित्व से वंचित चमोली जिले को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व दिलाकर लंबे समय से चली आ रही कसक को दूर करने का प्रयास किया है।