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मुख्यमंत्री साय ने ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को दिखाई हरी झंडी

जशपुर 05 फरवरी।छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने की दिशा में एक निर्णायक पहल करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अपने गृह नगर जशपुर से ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ बाल विवाह के दुष्परिणामों के प्रति जनजागरूकता फैलाने के साथ-साथ लोगों को इसके खिलाफ शपथ दिलाने का कार्य करेगा।

  ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ 8 मार्च तक पूरे छत्तीसगढ़ के गांवों और कस्बों से होकर गुजरेगा। यह पहल भारत सरकार के बाल विवाह के खिलाफ चलाए जा रहे 100-दिवसीय गहन राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) द्वारा संचालित की जा रही है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन देश का सबसे बड़ा नागरिक समाज नेटवर्क है, जिसके 250 से अधिक सहयोगी संगठन 450 जिलों में 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने और बाल संरक्षण तंत्र को सशक्त बनाने के लिए कार्यरत हैं।

पोस्टरों, लाउडस्पीकरों पर प्रभावशाली संदेशों और बाल विवाह के खिलाफ प्रतिज्ञा लेने हेतु लगाए गए शपथ पट से सुसज्जित यह रथ इस तरह डिजाइन किया गया है कि राज्य के सबसे दूरस्थ और हाशिये पर बसे समुदायों तक भी पहुंच सके। जहां चारपहिया वाहन प्रमुख मार्गों को कवर करेंगे, वहीं अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में मोटरसाइकिल और साइकिल कारवां के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने बाल विवाह के खिलाफ जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में बाल विवाह की घटनाओं में पहले ही उल्लेखनीय कमी आई है और बालोद जिला राज्य का पहला बाल विवाह मुक्त जिला घोषित किया जा चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार, नागरिक समाज और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से राज्य को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त बनाया जा सकेगा।

बाल विवाह उन्मूलन की दिशा में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। वर्ष 2025 में बालोद जिला देश का पहला बाल विवाह मुक्त जिला बना, जबकि सूरजपुर जिले की 75 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया गया है। ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” का संदेश राज्य के अंतिम गांव तक पहुंचाएगा।

चाइल्ड मैरेज फ्री इंडिया के राष्ट्रीय समन्वयक बिधान चंद्र सिंह ने कहा कि मजबूत साझेदारियों, राजनीतिक इच्छाशक्ति और निरंतर जमीनी प्रयासों के चलते छत्तीसगढ़ पूरे देश के लिए एक मिसाल बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क ने देशभर में 1,98,628 बाल विवाह रोके हैं, जिनमें से 3,988 मामले अकेले छत्तीसगढ़ के हैं।

अपनी यात्रा के दौरान ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ पंचायतों, जिला प्रशासन, बाल विवाह निषेध अधिकारियों (सीएमपीओ) और अन्य सरकारी विभागों के सहयोग से स्कूलों, ग्राम सभाओं, धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचेगा। नुक्कड़ नाटकों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पीड़ितों व सर्वाइवरों की कहानियों के माध्यम से यह अभियान समुदायों को जागरूक और संगठित करेगा। यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर संपन्न होगी।

गौरतलब है कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह का आयोजन करने, उसे बढ़ावा देने या जानबूझकर उसमें शामिल होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।