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प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मानस की सीख: IAS अभ्यर्थियों के लिए आई नई पुस्तक

रायपुर, 9 फरवरी।संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की अखिल भारतीय परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अब महाकवि तुलसीदास के महाकाव्य श्रीरामचरित मानस भी मार्गदर्शक बन सकता है। इसी उद्देश्य से वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक वसन्त वीर उपाध्याय की एक महत्वपूर्ण पुस्तक प्रकाशित हुई है।

  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित प्रेस क्लब में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस पुस्तक का विधिवत विमोचन किया। यह पुस्तक विशेष रूप से आईएएस सहित अन्य अखिल भारतीय सेवाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए उपयोगी मानी जा रही है।
पुस्तक का शीर्षक है — ‘आईएएस की तैयारी और श्रीरामचरित मानस’

  मुख्यमंत्री श्री साय ने पुस्तक के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए लेखक को बधाई दी और इसे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को मूल्य आधारित दृष्टिकोण प्रदान करती है।

    यह पुस्तक रायपुर प्रेस क्लब के नव-निर्वाचित पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण समारोह के अवसर पर भी विमोचित की गई, जिसमें मुख्यमंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

पुस्तक में UPSC परीक्षा की तैयारी के सात चरणों को श्रीरामचरित मानस के सात सोपानों—
बालकाण्ड, अयोध्या काण्ड, अरण्य काण्ड, किष्किंधा काण्ड, सुन्दर काण्ड, लंका काण्ड और उत्तर काण्ड—से जोड़कर उनकी प्रेरक व्याख्या की गई है।

   समारोह में उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा और मोतीलाल साहू, रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. हिमांशु द्विवेदी, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा एवं आर. कृष्णादास, प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी सहित बड़ी संख्या में पत्रकार, साहित्यकार और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे।

   लेखक श्री उपाध्याय ने पुस्तक की विषय-वस्तु पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें देश-प्रदेश के लगभग 32 आईएएस अधिकारियों से संवाद पर आधारित अनुभव भी शामिल हैं, जिससे अभ्यर्थियों को परीक्षा की वास्तविक तैयारी समझने में मदद मिलेगी।
पुस्तक के पहले भाग में ‘माय फर्स्ट इंटरव्यू’ श्रृंखला के अंतर्गत अधिकारियों के अनुभव प्रस्तुत किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि श्रीरामचरित मानस के सात सोपान न केवल मानव जीवन बल्कि UPSC जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी प्रेरणादायक हैं।
उदाहरण के तौर पर—

  • बालकाण्ड अहंकार और बचकानी भूलों से सीख लेने की प्रेरणा देता है।
  • अयोध्या काण्ड मानसिक द्वंद्व से मुक्त रहकर शांत और दृढ़ निर्णय लेने की शिक्षा देता है।
  • अरण्य काण्ड भ्रम और भटकाव से बचने का संदेश देता है, जैसा कि स्वर्ण मृग और साधुवेश प्रसंगों में दिखाई देता है।

लेखक के अनुसार, यह पुस्तक लक्ष्य निर्धारण, रणनीति निर्माण और मूल अवधारणाओं को सांस्कृतिक दृष्टिकोण से समझाने का प्रयास है।