
दुर्ग, 10 फरवरी।रंग-बिरंगी लोक-संस्कृतियों से समृद्ध छत्तीसगढ़ में रंगोली चित्रकला के क्षेत्र में श्रीमती स्मिता वर्मा एक तेजी से उभरती हुई प्रतिभा के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। अब तक वे लगभग पाँच सौ से अधिक रंगोली चित्रों का सृजन कर चुकी हैं और अनेक रंगोली प्रतियोगिताओं में उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है।
स्मिता वर्मा की रंगोली कला में राष्ट्रीय, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्वों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ एवं देश की महान विभूतियों के चित्र प्रमुखता से शामिल हैं। उन्होंने देश के सैनिकों, श्रमिकों और आध्यात्मिक गुरुओं को भी अपनी रंगोली के माध्यम से सम्मानित किया है। उनके प्रमुख विषयों में वीर हनुमान, छत्रपति शिवाजी महाराज, स्वामी दयानंद सरस्वती, गुरु बाबा घासीदास, महात्मा गांधी और सावित्रीबाई फुले जैसी विभूतियों के चित्र शामिल हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति, नागपंचमी, क्रिसमस, स्वतंत्रता दिवस जैसे पर्व-त्योहारों और नशा-मुक्ति जैसे सामाजिक जन-जागरण विषयों को भी उन्होंने अपनी रंगोली कला में स्थान दिया है।
दुर्ग जिले के ग्राम लिमतरा में जन्मी स्मिता वर्मा वर्तमान में तहसील पाटन के ग्राम कातरो स्थित शासकीय हायर सेकेण्डरी स्कूल में गणित की व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं। वे बताती हैं कि अध्यापन कार्य के बाद का समय वे रंगोली चित्रकला की साधना में लगाती हैं। आस-पास की महिलाओं के साथ रंगोली कला पर चर्चा, अनुभवों का आदान-प्रदान और बच्चों को इस लोककला से जोड़ने का प्रयास भी उनका नियमित कार्य है।
स्मिता वर्मा के अनुसार छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति में पर्व-त्योहारों के अवसर पर घरों के आंगन में चौक पूरने और ‘हाथा’ (हाथ का प्रतीक चिन्ह) देने की परंपरा रही है, जिसे शुभ माना जाता है। अलग-अलग त्योहारों में अलग-अलग प्रकार के चौक बनाए जाते हैं। ग्रामीण महिलाएँ पूजा, विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर इस पारंपरिक लोककला के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत करती हैं। इन्हीं परंपराओं को देखकर स्मिता को भी रंगोली चित्रकला से जुड़ने की प्रेरणा मिली। उन्होंने बचपन से ही इस कला को साधा और परिवारजनों के साथ-साथ भिलाई नगर में पड़ोस की महिलाओं से भी इसे मन लगाकर सीखा।
रंगोली कला के साथ-साथ स्मिता वर्मा ने सिलाई कार्य का भी विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वे छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा की सुपुत्री तथा दूरदर्शन केंद्र रायपुर के चर्चित कलाकार महेश वर्मा की भतीजी हैं। लेखन के क्षेत्र में भी उनकी गहरी रुचि है और उनके द्वारा लिखित यात्रा-वृत्तांतों की पुस्तक शीघ्र ही प्रकाशित होने वाली है।
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