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बघेल के विभागो की 12,500 करोड़ रूपए की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित

रायपुर 26 फरवरी।छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए 12,500 करोड़ 49 लाख 64 हजार रूपए की अनुदान मांगें चर्चा के बाद ध्वनिमत से परित कर दी गयीं।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने विभागों की अनुदान मांगो पर चर्चा करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने घोषणा पत्र में किए गए वायदों में से लगभग आधे वायदों को केवल दो माह में पूरा किया। नयी सरकार ने अपने पहले दिन से ही घोषणा पत्र के वादों को पूरा करने कार्य शुरू कर दिया गया था। हमारी सरकार तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी साठ दिन की सरकार की तुलना साठ माह की सरकार या पन्द्रह साल की सरकार से की जा सकती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने वित्तीय प्रबंधन का मसला उठाया है। हमारी सरकार ने अन्नदाता किसानों को कर्जे से मुक्ति दिलाने का कार्य किया है और उन्हें धान की अधिक कीमत प्रति क्विटल दो हजार पांच सौ रूपए देने कार्य किया है। उन्होंने बताया कि जनवरी 2019 की स्थिति में 18 हजार करोड़ रूपए का बजट घाटा है और मार्च के अंत तक व्यय में कटौती करेगें, वित्तीय प्रबंधन को नियंत्रित रखने के साथ घाटे में भी कमी लाएंगे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019-20 में बजट घाटे को 10 हजार 500 करोड़ रूपए तक सीमित करेंगे।

उन्होने कहा पिछली सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन के कारण मढ़वा ताप विद्युत गृृह की लागत 6 हजार करोड रूपए से बढ़कर 9 हजार करोड रूपए हो गई। प्लांट लगने से पहले महंगी मशीने खरीदी गई और कर्ज लिया गया। इस ताप विद्युत गृह में हिन्दुस्तान में सबसे महंगी दर पर बिजली का उत्पादन हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा छत्तीसगढ़ में पिछले 15 सालों में बिजली की दर पांच गुना बढी हैं।अस्सी पैसे की दर बढकर तीन रूपए सत्तर पैसे तथा कृषि की बिजली दर एक रूपए से बढकर चार रूपए सत्तर पैसे हुई।उन्होने कहा कि पहले छत्तीसगढ राज्य को मेजर खनिज (कोयला खदान) के नीलामी में रूप में 500 से 3200 रूपए प्रति टन की रायल्टी राशि मिलती थी, लेकिन बाद में बिना नीलाम के खदानों के आवंटन से रायल्टी दर मात्र 100 रूपए प्रति टन मिलती है। इससे राज्य के राजस्व को करोडों रूपए की आर्थिक क्षति हुई है।

उन्होने विधानसभा में घोषणा की कि वित्तीय अनुशासन के लिए राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में वर्तमान में स्थापित पांच विद्युत कम्पनियों की संख्या को कम कर दो कम्पनियों बनाने पर विचार किया जाएगा।उन्होने बताया कि रेत जैसे गौण खनिज उत्खनन पर पंचायतों को केवल 10 करोड़ रूपए की रायल्टी मिलती थी। प्रदेश में तीन सौ रेत की खदानें है और प्रति घन मीटर पचास रूपए की रायल्टी ली जाती थी। इस मान से देखा जाए तो प्रतिदिन एक रेत खदान से आश्चर्यजनक रूप से मात्र 2 या 3 ट्रक रेत का ही उत्खनन होता था। हमारी सरकार रेत खनन का कार्य ईमानदारी से करना चाहती है और इसी कारण रेत खदानों में सीसीटीवी लगाए जाएंगे। इसी तरह सैटेलाइट और जीपीएस सिस्टम से भी जांच की जा सकती है जिसका उपयोग किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि हमनें अवैध रूप से रेत खनन माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की है और खनिज विभाग के माध्यम से सैकड़ों डम्पर, हाईवा एवं वाहनों को पकड़ा है। उन्होंने कहा कि इस नीति से राज्य शासन के रायल्टी में वृद्धि होगी, हमारी सरकार पंचायतों को उनके द्वारा प्राप्त की जाने वाली रायल्टी से 25 प्रतिशत अधिक की राशि प्रदान करेगी।

मुख्यमंत्री ने सीमेंट के दाम बढ़ने की विपक्ष द्वारा आलोचना किए जाने पर कहा कि सीमेंट के दाम पर नियंत्रण केन्द्र सरकार का विषय है, फिर भी राज्य सरकार अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए सीमेंट के दाम कम करने के लिए जल्द ही सीमेंट कंपनियों की बैठक बुलाकर उनके साथ विचार-विमर्श करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार अम्बिकापुर, जगदलपुर और बिलासपुर की हवाई पट्टियां तेजी से पूरा कराएंगे और यह सुनिश्चित करेगी कि इन हवाई पट्टियों का केवल उद्घाटन ही ना हो, अपितु विमान सेवाओं का संचालन भी हो।

उन्होने कहा कि जिला खनिज न्यास के नियमों के अवहेलना की गई। नियम के विपरीत जाकर कलेक्टेरेट में लिफ्ट बनायी गई, कमरे बनाए गए, स्वीमिंग पुल बनाया गया, हवाई पट्टी बनायी गई, ऑडीटोरीयम आदि बनाया गया। इसका राशि का उपयोग वहां के आदिवासी एवं खनन क्षेत्र से प्रभावित लोगों के हित में किया जाना था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार द्वारा बदलापुर की राजनीति नही की जा रही है यह ’बदलाव का दौर’ है। उन्होंने कहा बदला की बात तभी आती जब पुरानें सत्ता दल द्वारा आज की सत्तादल के सदस्यों को कोई नुकसान पहुंचाया जाता। लेकिन अगर उस समय में सत्ता दल में कोई अहित ही नहीं किया गया तो बदला की बात कहां से आ जाती है।

उन्होने कहा कि हम झीरम घाटी की सच्चाई को सामने लाना चाहते है और इसके लिए विपक्ष से अनुरोध है कि वे जांच के लिए भारत सरकार तथा देश के गृह मंत्री से जांच करने की अनुमति देने के लिए कहें तथा छत्तीसगढ़ को केस वापस करेें। उन्होंने कहा कि उन्हें सदन को यह बताते हुए तकलीफ हो रही है कि एक अधिकारी ने बिना अनुमति के फोन के टेपिंग कराने का कार्य किया और यह बात रिकार्ड में है।