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शिक्षा में मेंटरशिप: सामाजिक न्याय की ओर एक सशक्त कदम – ओ. पी. चौधरी

रायपुर, 29 अगस्त। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को प्रभावी रूप से लागू करने और शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, नीति आयोग द्वारा रायपुर में “Fostering Mentorship in Education: A Pathway to Equity” विषय पर एक राष्ट्रीय परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में नीति-निर्माताओं, शिक्षा विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया।

  मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी ने कहा, “शिक्षा में मेंटरशिप सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण का आधार है। यह स्कूल, उच्च शिक्षा और कौशल विकास – तीनों क्षेत्रों में समानता लाने का माध्यम बन सकती है।”उन्होंने इसे एक साझा राष्ट्रीय ढांचा तैयार करने का सुनहरा अवसर बताया, जो “विकसित भारत” के सपने को साकार करने में सहायक हो सकता है।

   श्री चौधरी ने राज्य की जनसांख्यिकीय विशेषताओं की चर्चा करते हुए बताया कि जहां भारत की औसत आयु 28 वर्ष है, वहीं छत्तीसगढ़ में यह मात्र 24 वर्ष है। उन्होंने कहा कि इस युवा शक्ति को अर्थव्यवस्था से जोड़ना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।अपना अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वे एक सरकारी स्कूल से पढ़े हैं जहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। उन्होंने महसूस किया कि “17 वर्षों की औपचारिक शिक्षा के बाद भी कई युवा यह तय नहीं कर पाते कि जीवन में क्या करना है। मेंटरशिप और करियर गाइडेंस इस अंतर को पाट सकते हैं।”

   उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि स्थानीय भाषा और संस्कृति आधारित शिक्षा विशेष रूप से बस्तर जैसे क्षेत्रों में अधिक प्रभावी हो सकती है। “बस्तर के बच्चे जंगल और झरनों से जुड़े हैं, इसलिए शिक्षा में उनकी स्थानीय जीवन शैली का समावेश ज़रूरी है।”

“हर बच्चे को मेंटरशिप मिलना उसका अधिकार है” – डॉ. वी. के. पॉल

नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल ने ड्रॉपआउट दरों की गंभीरता पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि:

  • प्राथमिक स्कूलों में नामांकन दर 93% है,
  • लेकिन अपर प्राइमरी में यह दर गिरकर 90% हो जाती है,
  • सेकेंडरी स्तर पर सिर्फ 56% बच्चे पहुंचते हैं,
  • और 12वीं तक मात्र 23% छात्र ही पहुँच पाते हैं।

डॉ. पॉल ने कहा, “2019 से 2023 के बीच केंद्रीय विश्वविद्यालयों से 15,000 और IIT-IIM जैसे संस्थानों से 4,000 से अधिक ओबीसी, एससी, एसटी छात्र ड्रॉपआउट हुए हैं। यह सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय क्षति है।”

   उन्होंने यह भी कहा कि मेंटरशिप से बच्चों को आत्मविश्वास, जीवन कौशल और दिशा मिलती है। शिक्षा व्यवस्था को मानव-केंद्रित दृष्टिकोण से देखना होगा, जिसमें हर बच्चे को मेंटरशिप देना उसका अधिकार माना जाए।