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साय सुशासन तिहार 2026 की निगरानी करेंगे खुद

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रायपुर, 1 मई।छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जनकेंद्रित और संवेदनशील बनाने के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन का वास्तविक चेहरा अधिकारी होते हैं, इसलिए उनका व्यवहार ही सरकार की छवि तय करता है। आम नागरिकों के साथ शालीन, धैर्यपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना हर अधिकारी की जिम्मेदारी है।

       मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जनता की बात सुनना प्रशासन का पहला कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे समस्याओं को गंभीरता से सुनें और समाधान आधारित दृष्टिकोण अपनाएं। उनके अनुसार, संवाद तभी सार्थक होता है जब उसमें संवेदनशीलता और समाधान की प्रतिबद्धता हो।

      उन्होंने सभी विभागों को जनसमस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और भरोसेमंद बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोई नागरिक सरकारी कार्यालय पहुंचे, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात को महत्व दिया जा रहा है और उसके साथ सम्मानजनक व्यवहार हो रहा है। यही अनुभव जनता के मन में विश्वास पैदा करता है।

      मुख्यमंत्री साय ने यह भी कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लोगों के अनुभवों से तय होती है। इसलिए अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहकर लोगों से सीधे संवाद करना चाहिए और उनकी वास्तविक जरूरतों के अनुसार कार्य करना चाहिए। उन्होंने संवेदनशीलता और तत्परता को प्रशासन की सबसे बड़ी ताकत बताया।

    पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रशासन की आधारशिला बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास सबसे बड़ी पूंजी है, जिसे ईमानदारी और विनम्र व्यवहार से ही बनाए रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सुशासन नीतियों के साथ-साथ व्यवहार से भी स्थापित होता है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वे सरल, सहयोगात्मक और त्वरित समाधान की कार्यशैली अपनाते हैं, तो प्रशासन स्वतः अधिक प्रभावी होगा और शिकायतों में कमी आएगी। उन्होंने विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रशासन को सुलभ, संवेदनशील और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया।

   मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि “सुशासन तिहार 2026” के दौरान वे स्वयं विभिन्न क्षेत्रों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे। इस दौरान अधिकारियों के कार्य के साथ-साथ उनके व्यवहार और जनसंपर्क की गुणवत्ता का भी आकलन किया जाएगा।

   गौरतलब है कि “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन 1 मई से 10 जून तक पूरे प्रदेश में किया जा रहा है। इसके तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समाधान शिविर लगाए जाएंगे, जहां पंचायत और वार्ड स्तर पर आवेदन लेकर जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाएगा। इस अभियान में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी होगी और स्वयं मुख्यमंत्री समय-समय पर निरीक्षण कर योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करेंगे।