नई दिल्ली, 13 जून। INDIA गठबंधन की हालिया बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने विपक्षी दलों के समक्ष एक व्यापक राजनीतिक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ संघर्ष को केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में विपक्ष को अपनी रणनीति और सोच दोनों बदलनी होंगी तथा लोकतंत्र, संविधान और संस्थाओं की रक्षा के लिए व्यापक जन-प्रतिरोध का रास्ता अपनाना होगा।
बैठक में उपस्थित विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि देश की राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और विपक्ष को भी उसी अनुरूप अपने संघर्ष के तरीके बदलने होंगे। उन्होंने दावा किया कि BJP और RSS ने भारतीय राज्य की कई महत्वपूर्ण संस्थाओं पर प्रभाव स्थापित कर लिया है, जिसके कारण विपक्ष के लिए निष्पक्ष राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का वातावरण कमजोर हुआ है।
आलोचनाओं को स्वीकार करने की बात
अपने संबोधन की शुरुआत में राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और उनके खिलाफ जो भी आलोचनाएं होती हैं, उन्हें वे स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी भूमिका आलोचनाओं का जवाब देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मसात करना और विपक्षी दलों को साथ लेकर चलना है।
उन्होंने कहा कि विपक्षी एकता को मजबूत बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। राहुल गांधी ने कहा कि गठबंधन के भीतर मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन इन मतभेदों को संघर्ष की राह में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।
कांग्रेस को बताया प्रतिरोध आंदोलन की विरासत वाला संगठन
राहुल गांधी ने कांग्रेस पार्टी के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस का गठन आधुनिक भारतीय राज्य के निर्माण से पहले हुआ था और यह मूल रूप से एक प्रतिरोध आंदोलन के रूप में विकसित हुई थी। उन्होंने कहा कि अन्य कई राजनीतिक दलों के विपरीत कांग्रेस की जड़ें सत्ता संरचना में नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन और लोकतांत्रिक संघर्ष में रही हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी उस विचार की रक्षा करती है जिसमें सभी भारतीयों को समान अधिकार और सम्मान प्राप्त हो। राहुल गांधी के अनुसार, सत्य, अहिंसा और करुणा कांग्रेस की मूल वैचारिक नींव हैं और इन्हीं मूल्यों के आधार पर पार्टी आगे भी संघर्ष जारी रखेगी।
BJP और RSS पर साधा निशाना
राहुल गांधी ने अपने भाषण में BJP और RSS पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस कभी भी उनके साथ वैचारिक समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि लाखों कांग्रेस कार्यकर्ता ऐसे हैं जो किसी भी परिस्थिति में RSS की विचारधारा के सामने झुकने को तैयार नहीं होंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग, नौकरशाही, केंद्रीय जांच एजेंसियां, कानूनी व्यवस्था और अन्य संस्थाएं स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पा रही हैं। राहुल गांधी ने दावा किया कि विपक्षी दल अभी भी यह मानकर चल रहे हैं कि उन्हें निष्पक्ष राजनीतिक मैदान उपलब्ध है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
सहयोगी दलों को दी चेतावनी
राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के घटक दलों का नाम लेते हुए कहा कि कुछ दल अभी भी यह मानते हैं कि पारंपरिक राजनीतिक रणनीतियां पर्याप्त होंगी, लेकिन उन्हें बदलती परिस्थितियों को समझना होगा। उन्होंने कहा कि BJP की राजनीतिक और संस्थागत ताकत का मुकाबला केवल चुनावी गणित से नहीं किया जा सकता।
उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों में उन्होंने स्वयं देखा है कि किस प्रकार राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष को यह समझना होगा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए अधिक व्यापक और जनआधारित संघर्ष की आवश्यकता है।
‘हम 2024 का चुनाव हारे नहीं’
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उनकी दृष्टि में विपक्ष ने 2024 का लोकसभा चुनाव नहीं हारा। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणामों के बावजूद विपक्ष ने देश के राजनीतिक विमर्श को बदलने में सफलता हासिल की है।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को निराश होने की आवश्यकता नहीं है और उसे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। राहुल गांधी ने दावा किया कि जनता के बीच सरकार के खिलाफ व्यापक असंतोष मौजूद है, जिसे संगठित राजनीतिक शक्ति में बदला जा सकता है।
‘प्रतिरोध ही सबसे बड़ा हथियार’
राहुल गांधी ने अपने भाषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा प्रतिरोध की अवधारणा को बताया। उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक और संस्थागत रास्ते सीमित हो जाएं, तब लोकतांत्रिक प्रतिरोध सबसे प्रभावी माध्यम बन जाता है।
उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा के दौरान उन्होंने देशभर में लोगों के बीच लोकतंत्र और संविधान को लेकर गहरी चिंता देखी। उनके अनुसार, जनता की सक्रिय भागीदारी और शांतिपूर्ण प्रतिरोध ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा कर सकते हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रतिरोध किसी संगठन का नाम नहीं, बल्कि एक सोच और भावना है। उन्होंने विपक्षी दलों से अपील की कि वे हर दिन यह सोचें कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए वे क्या कर सकते हैं।
सोशल मीडिया और मीडिया पर भी उठाए सवाल
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया और मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पूरी तरह निष्पक्ष हैं। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष की आवाज को कई बार सीमित करने की कोशिश की जाती है और सूचना तंत्र का बड़ा हिस्सा सत्ता पक्ष के पक्ष में कार्य करता दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को जनता तक पहुंचने के लिए नए और अधिक प्रभावी माध्यम विकसित करने होंगे।
विपक्षी एकता पर दिया जोर
राहुल गांधी ने कहा कि INDIA गठबंधन के भीतर विचारों और रणनीतियों को लेकर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लक्ष्य पर सभी दल एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि BJP और उसके समर्थक विपक्ष को कमजोर और बिखरा हुआ दिखाने का प्रयास करते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि गठबंधन के सभी दल साझा उद्देश्यों के लिए साथ खड़े हैं।
उन्होंने DMK, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और अन्य सहयोगी दलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी दल लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भविष्य की लड़ाई का दिया संदेश
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं से आत्मविश्वास बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष संगठित होकर जनता के बीच संघर्ष करता है, तो BJP को चुनौती देना संभव है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को यह विश्वास रखना चाहिए कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई अंततः जनता की शक्ति से ही जीती जाएगी। राहुल गांधी ने गठबंधन के नेताओं से एक-दूसरे के प्रति सम्मान, धैर्य और सहयोग की भावना बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि आने वाले समय में विपक्ष को और अधिक समन्वित तथा आक्रामक रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।
बैठक में राहुल गांधी के इस विस्तृत संबोधन को विपक्ष की भविष्य की राजनीतिक रणनीति और INDIA गठबंधन की दिशा तय करने वाले महत्वपूर्ण वक्तव्य के रूप में देखा जा रहा है।




