नई दिल्ली, 03 जुलाई। पवित्र अमरनाथ यात्रा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश-विदेश से यात्रा पर जाने वाले शिवभक्तों के नाम एक विशेष संदेश जारी किया है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए अमरनाथ यात्रा को भारत की सनातन आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक एकता और निःस्वार्थ सेवा भाव का प्रतीक बताया। साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान पांच महत्वपूर्ण संकल्प अपनाने का आग्रह किया।
इस वर्ष अमरनाथ यात्रा की शुरुआत के साथ ही बारिश के बीच बालटाल और पहलगाम आधार शिविरों से श्रद्धालुओं के पहले जत्थे ने बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए प्रस्थान किया। पहले जत्थे में 10 हजार से अधिक श्रद्धालु शामिल हैं। बालटाल मार्ग से जाने वाले श्रद्धालु उसी दिन पवित्र गुफा तक पहुंचेंगे, जबकि पहलगाम मार्ग से यात्रा करने वाले श्रद्धालु अगले दिन दोपहर बाद दर्शन करेंगे। यह वार्षिक यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि जम्मू-कश्मीर में आयोजित होने वाली अमरनाथ यात्रा प्रत्येक श्रद्धालु के लिए आस्था और सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि ज्येष्ठ पूर्णिमा की प्रथम पूजा के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन का क्रम प्रारंभ होता है और देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में शामिल होने के लिए जम्मू-कश्मीर पहुंचते हैं।
उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा भारत की आध्यात्मिक परंपरा का ऐसा शाश्वत अध्याय है, जहां अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से जुड़े श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए एकजुट होते हैं। प्रधानमंत्री ने श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड, जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की यात्रा के सफल संचालन में निभाई जा रही भूमिका की सराहना की।
प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), जम्मू-कश्मीर पुलिस, आईटीबीपी, बीएसएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों एवं कर्मचारियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सफाई कर्मियों तथा सेवा कार्य में जुटे सभी स्वयंसेवकों का विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा भारत की “विविधता में एकता” और सेवा की संस्कृति का जीवंत उदाहरण है, जहां स्थानीय लोग श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हैं और देशभर से आने वाले श्रद्धालु भंडारों एवं लंगरों के माध्यम से सेवा का कार्य करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने श्रद्धालुओं से यात्रा के दौरान पांच संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सभी श्रद्धालु यात्रा मार्ग को स्वच्छ रखने में अपना योगदान दें, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करें तथा बारिश, फिसलन और ठंड से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतें। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान के तहत यात्रा पर होने वाले खर्च का कम से कम 10 प्रतिशत स्थानीय उत्पादों की खरीद पर खर्च करने की अपील की, ताकि जम्मू-कश्मीर के स्थानीय परिवारों और युवाओं की आजीविका को मजबूती मिल सके।
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने अमरनाथ यात्रा के समापन दिवस रक्षाबंधन के अवसर पर अपने भाई या बहन को एक पौधा उपहार में देने और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने श्रद्धालुओं से वर्षभर ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करते हुए विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का भी आह्वान किया।
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि बाबा अमरनाथ की यह पावन यात्रा सनातन आस्था, भारतीय सांस्कृतिक एकता और सेवा परंपरा का भव्य उत्सव बनेगी। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित, मंगलमय और सफल यात्रा की कामना करते हुए बाबा बर्फानी से सभी पर अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।




