
रायपुर, 02 फरवरी।छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार पर समर्थन मूल्य पर धान खरीदी बंद कर किसानों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में अभी भी लाखों किसान अपना धान नहीं बेच पाए हैं, जबकि सरकार ने खरीदी प्रक्रिया को समय से पहले समाप्त कर दिया।
श्री बैज ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि इस वर्ष सरकार ने मात्र 53 दिनों तक ही धान खरीदी की, जबकि पहले 75 दिनों तक खरीदी का वादा किया गया था। धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी थी, लेकिन अंतिम दो दिन शनिवार और रविवार होने के कारण खरीदी नहीं हो सकी। सरकार द्वारा घोषित 165 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध केवल 139 लाख 85 हजार मीट्रिक टन धान ही खरीदा गया, जो लक्ष्य से लगभग 25 लाख मीट्रिक टन कम है। पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल 9 लाख 15 हजार मीट्रिक टन कम खरीदी हुई है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कुल 27 लाख किसानों का पंजीयन हुआ था, जिनमें से लगभग 2.5 लाख किसान अपना धान नहीं बेच पाए। वहीं, एग्रीस्टेक पोर्टल की तकनीकी खामियों के कारण करीब 5 लाख किसानों का पंजीयन ही नहीं हो सका। कई किसानों से बिना सहमति जबरन रकबा सरेंडर करवाया गया और पहले से जारी टोकन भी निरस्त कर दिए गए, जिससे हजारों किसान प्रभावित हुए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि धान खरीदी नहीं होने और टोकन नहीं मिलने से महासमुंद, कवर्धा, कोरबा सहित कई जिलों में किसानों ने आत्महत्या का प्रयास किया, वहीं एक किसान द्वारा आत्महत्या की घटना भी सामने आई है। यह दर्शाता है कि धान खरीदी को लेकर प्रदेश के किसान गंभीर संकट में हैं।
उन्होंने बताया कि केवल नारायणपुर, बलरामपुर और बस्तर जिलों में ही पिछले वर्ष के लगभग बराबर धान खरीदी हुई है, जबकि शेष जिलों में 5 प्रतिशत से लेकर 32 प्रतिशत तक खरीदी में गिरावट दर्ज की गई है।
दीपक बैज ने आरोप लगाया कि सरकार ने कम खरीदी पर जश्न मनाया और अधिकारियों व कर्मचारियों को बधाई संदेश भेजे गए। उन्होंने कहा कि यदि खरीदी लक्ष्य से कम हुई है तो बधाई नहीं, बल्कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए। इससे स्पष्ट है कि सरकार का उद्देश्य ही कम धान खरीदी करना था।
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