अमेरिकी संसदीय समिति के सामने विशेषज्ञों ने खुलासा किया कि चीन का बढ़ता सैन्य और आर्थिक प्रभुत्व भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा रहा है और दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा जारी है। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैनिकों के पीछे हटने के बावजूद सीमा पर सैन्य गतिविधियां और चीन का निर्माण जारी है। पढ़ें रिपोर्ट-
अमेरिका की एक संसदीय समिति को मंगलवार को शीर्ष अमेरिकी और भारतीय विशेषज्ञों ने बताया कि चीन का बढ़ता सैन्य प्रभाव, आर्थिक प्रभुत्व और तकनीकी ताकत भारत की रणनीतिक चिंताओं को और बढ़ा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि हाल की कूटनीतिक संबंधों में गर्माहट के बावजूद नई दिल्ली और बीजिंग के बीच प्रतिस्पर्धा जारी है।
अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग के सामने गवाही देते हुए शिक्षाविदों, थिंक टैंक के विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों ने कहा कि अक्तूबर 2024 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पीछे हटने की प्रक्रिया से तुरंत तनाव तो कम हुआ, लेकिन भारत और चीन के बीच शक्ति संतुलन में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया।
सीमा पर अब भी सैन्य गतिविधियां जारी: समीर लालवानी
समीर लालवानी ने आयोग को बताया कि अनिश्चितता के बावजूद भारत चीन को दुश्मन के रूप में ही देखता रहेगा और क्षेत्रीय, राजनीतिक, आर्थिक और तकनीकी कारणों से चीन के साथ प्रतिस्पर्धा में उलझा रहेगा। उन्होंने कहा कि सीमा पर अब भी सैन्य गतिविधियां जारी हैं और सैन्य संतुलन चीन के पक्ष में है।
लालवानी ने कहा कि तिब्बत और विवादित क्षेत्रों में चीन की ओर से संरचना का निर्माण जारी है, भले ही सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया हो चुकी हो। उन्होंने चेताया कि दलाई लामा के उत्तराधिकार संकट सहित कोई भी राजनीतिक संकट अनजाने में या जानबूझकर बड़े पैमाने पर पारंपरिक युद्ध में तब्दील हो सकता है।
भारत-चीन संबंधों में गर्माहट अस्थायी: तन्वी मदन
ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूट की तन्वी मदन ने कहा कि यह मौजूदा स्थिति को भारत-चीन संबंधों में रणनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि अस्थायी गर्माहट है। उन्होंने कहा, भारत की अपने सबसे बड़े पड़ोसी के साथ संरचनात्मक प्रतिद्वंद्विता बनी हुई है और 2020 के सीमा संकट के बाद चीन पर भरोसा बहुत कम हो गया है।
नई दिल्ली की सुरक्षा चिंता केवल सीमाओं तक नहीं: सौम्या भाविक
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) की सौम्या भाविक ने कहा, भारत की सुरक्षा चिंता अब उसकी सीमाओं तक सीमित नहीं है। दक्षिण एशिया और हिंद महासागर में चीन की बढ़ती गतिविधियों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। चीन की नौसैनिक गतिविधियां और पड़ोसी देशों के साथ आर्थिक जुड़ाव ने भारत के आसपास चीन के रणनीतिक प्रभाव को पहले से कहीं अधिक मजबूत कर दिया है।
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