
नई दिल्ली, 11 फरवरी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संबोधन के दौरान मोदी सरकार पर आज तीखा हमला बोला। भारत-अमेरिका संबंधों, डेटा सुरक्षा, ऊर्जा नीति, टैरिफ और वैश्विक राजनीति जैसे मुद्दों पर उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए और कहा कि देश के हितों से समझौता नहीं होना चाहिए।
श्री गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत मार्शल आर्ट के उदाहरण से की। उन्होंने कहा कि जूडो, कराटे और जुजुत्सु जैसे खेलों में संतुलन, रणनीति और पकड़ (ग्रिप) का महत्व होता है। राजनीति में भी ऐसी ही “ग्रिप” होती है, फर्क सिर्फ इतना है कि यहां यह दिखाई नहीं देती। उन्होंने संकेत दिया कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ताकतवर देश कमजोर देशों पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाते हैं।
भारत-यूएस डील पर बोलते हुए श्री गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने देश के हितों की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में सबसे बड़ा डेटा संसाधन रखने वाला देश है और इसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके मुताबिक, अमेरिका और चीन जैसे देश भारतीय डेटा पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में डेटा सुरक्षा को केंद्र में क्यों नहीं रखा गया।
टैरिफ और व्यापार नीति पर भी उन्होंने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाए जाने से भारतीय उद्योगों पर असर पड़ा है। उदाहरण देते हुए उन्होंने टेक्सटाइल सेक्टर का उल्लेख किया और पूछा कि यदि अन्य देशों को शून्य टैरिफ का लाभ मिलता है, तो भारत को क्या फायदा हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई देश यह तय करे कि भारत किससे तेल खरीदेगा, तो यह ऊर्जा क्षेत्र का “हथियारीकरण” है। डॉलर और वित्तीय तंत्र के इस्तेमाल को भी उन्होंने रणनीतिक दबाव का माध्यम बताया।
राहुल गांधी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया एक नए और संभावित रूप से चुनौतीपूर्ण दौर में प्रवेश कर रही है। 140 करोड़ भारतीयों के सामने डेटा, तकनीक और रोजगार से जुड़ी नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा बजट में इन विषयों पर स्पष्ट और ठोस प्रावधान नजर नहीं आते।
उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत होती है, तो सबसे पहले डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों पर चर्चा होनी चाहिए। इसके बाद ऊर्जा सुरक्षा, कृषि और किसानों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को बराबरी के आधार पर बातचीत करनी चाहिए।
अपने भाषण के दौरान राहुल गांधी ने अडानी-अंबानी का भी उल्लेख किया। साथ ही, एक अन्य संदर्भ में एप्सटीन फाइल का जिक्र करने पर सदन में हंगामा हुआ, जिसके बाद उन्होंने उस विषय पर आगे टिप्पणी नहीं की।
राहुल गांधी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा, गाजा और यूक्रेन जैसे संघर्ष, तथा वित्त और ऊर्जा संसाधनों का रणनीतिक इस्तेमाल नई विश्व व्यवस्था की ओर संकेत करता है। इन परिस्थितियों का असर भारत की आईटी कंपनियों और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
लोकसभा में दिए गए इस संबोधन में राहुल गांधी का रुख आक्रामक रहा और उन्होंने सरकार से मांग की कि वह राष्ट्रीय हितों, डेटा सुरक्षा और किसानों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
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