आलेख
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सामाजिक क्रांति की जरूरत है न कि भ्रान्ति की-रघु ठाकुर
(14 अप्रैल अम्बेडकर जयंती पर विशेष) हमारे देश के कुछ दलित बुद्धिजीवियों व स्वघोषित आंबेडकरवादियों ने अमेरिकी तर्ज पर…
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हाकी की नर्सरी के रूप में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की पहचान- धनंजय राठौर
हॉकी की नर्सरी के रूप में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की पहचान है। यहां के हॉकी खिलाड़़ी अपनी बेहतरीन खेल…
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सावरकर के ‘हिंदुत्व’ को डॉक्टर अम्बेडकर ने बताया था असंगत और देश के लिए खतरनाक -उर्मिलेश
उर्मिलेश संसद के शीतकालीन सत्र में ‘संविधान के 75 वर्ष’ के गौरवशाली मौके पर लोकसभा में दो दिनों की…
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जनसंख्या वृद्धि की संघ प्रमुख की सलाह तार्किक नही – रघु ठाकुर
रघु ठाकुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संचालक जनसंख्या वृद्धि दर की बहस में शामिल हो गए हैं। उन्होंने जनसंख्या वृद्धि दर…
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सब अर्बन ट्रेनों का परिचालन: निजीकरण की ओर बढ़ता कदम – रघु ठाकुर
रघु ठाकुर कुछ समाचार पत्रों में इस आशय के समाचार आए हैं कि सब-अर्बन ट्रेनों को रेल-नेटवर्क से अलग करके…
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‘रेजांगला युद्ध’ पर जमी धूल हटाने की कोशिश !-सन्तोष यादव
(18 नवम्बर शहादत दिवस पर विशेष) (सन्तोष यादव) इतिहास के पन्नों में दर्ज रेजांगला युद्ध की कहानियों पर जमी…
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बस्तर पहुंचना आज भी है दुश्कर ! – डा.राजाराम त्रिपाठी
आजादी के 78 साल बाद भी बस्तर की यातायात सुविधाएं देश के अन्य हिस्सों की तुलना में नितांत निराशाजनक हैं।…
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रतन टाटा: भारतीय उद्योग के महानायक और सेवा के प्रतीक-डा.राजाराम त्रिपाठी
रतन टाटा का देहावसान न केवल एक महान उद्योगपति की मृत्यु है, बल्कि भारतीय व्यवसायिक परंपरा और नैतिक मूल्यों…
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हिंदी दिवस: हिंदी का उत्सव या मातम ? –डा.राजाराम त्रिपाठी
मैं काफी हवाई यात्राएं करता हूं और किताबें पढ़ने का भी बड़ा शौकीन हूं, कई भाषाएं जानता समझता हूं पर…
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विसंगतियों की भेंट चढ़ती भारत की कृषि नीतियां – डा.राजाराम त्रिपाठी
“मरीज ए इश्क पर रहमत खुद की, मरज बढ़ता गया जूं जूं दवा की” मियां ग़ालिब की यह दो पंक्तिया…
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