आलेख
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सब अर्बन ट्रेनों का परिचालन: निजीकरण की ओर बढ़ता कदम – रघु ठाकुर
रघु ठाकुर कुछ समाचार पत्रों में इस आशय के समाचार आए हैं कि सब-अर्बन ट्रेनों को रेल-नेटवर्क से अलग करके…
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‘रेजांगला युद्ध’ पर जमी धूल हटाने की कोशिश !-सन्तोष यादव
(18 नवम्बर शहादत दिवस पर विशेष) (सन्तोष यादव) इतिहास के पन्नों में दर्ज रेजांगला युद्ध की कहानियों पर जमी…
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बस्तर पहुंचना आज भी है दुश्कर ! – डा.राजाराम त्रिपाठी
आजादी के 78 साल बाद भी बस्तर की यातायात सुविधाएं देश के अन्य हिस्सों की तुलना में नितांत निराशाजनक हैं।…
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रतन टाटा: भारतीय उद्योग के महानायक और सेवा के प्रतीक-डा.राजाराम त्रिपाठी
रतन टाटा का देहावसान न केवल एक महान उद्योगपति की मृत्यु है, बल्कि भारतीय व्यवसायिक परंपरा और नैतिक मूल्यों…
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हिंदी दिवस: हिंदी का उत्सव या मातम ? –डा.राजाराम त्रिपाठी
मैं काफी हवाई यात्राएं करता हूं और किताबें पढ़ने का भी बड़ा शौकीन हूं, कई भाषाएं जानता समझता हूं पर…
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विसंगतियों की भेंट चढ़ती भारत की कृषि नीतियां – डा.राजाराम त्रिपाठी
“मरीज ए इश्क पर रहमत खुद की, मरज बढ़ता गया जूं जूं दवा की” मियां ग़ालिब की यह दो पंक्तिया…
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छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति की देश-विदेश में अलग पहचान – छगनलाल लोन्हारे/जी.एस. केशरवानी
(विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त पर विशेष) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ में 32 प्रतिशत जनजातीय समुदाय की आबादी को…
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बजट 24: किसानों के साथ एक बार फिर छलावा- डा.राजाराम त्रिपाठी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट-24 दो मायनों में अभूतपूर्व रहा। पहली तो यह कि देश के इतिहास में पहली…
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ईरान के चुनाव: उम्मीद की नई किरण – रघु ठाकुर
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी दुनिया ने जो प्रतिबंध ईरान पर लगाये थे जिससे ईरान का व्यापार सिकुड़ा…
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देश के 85 प्रतिशत खेत हो रहे बांझ, इसका असल जिम्मेदार कौन ? – राजाराम त्रिपाठी
केन्द्र में एक और नई सरकार चुनकर आ गई है। पिछले 5 सालों में विभिन्न कारणों से किसान लगातार…
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