आलेख
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लोकतंत्र,समता और संपन्नता तीनों चाहिये साथ-साथ – रघु ठाकुर
समाजवादी विचारधारा को लेकर सदैव कई प्रकार के संशय और आरोप लगाए जाते रहे हैं। यद्यपि आजादी के कई वर्षों…
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नकली खाद का जाल, किसान परेशान – डा.राजाराम त्रिपाठी
बीज तो बोया था अमृतमय अन्न का, बोरी वाली खाद डाली थी बढ़िया सरकारी सील-ठप्पे वाली, पर फसल से…
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इजराइल और हमास युद्ध – रघु ठाकुर
इजराइल और हमास के बीच चल रहे दीर्घकालिक युद्ध के बीच इजराइल ने अचानक एक नया मोड़ लिया और ईरान…
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पंच परिवर्तन से बदल जाएगा समाज का चेहरा-मोहरा – प्रो. संजय द्विवेदी
(राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर विशेष) इतिहास के चक्र में किसी सांस्कृतिक संगठन के सौ साल की…
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क्या ‘मांसाहारी-दूध’ के लिए मजबूर किया जा रहा भारत ?- डा.राजाराम त्रिपाठी
जिस देश में गाय मात्र एक पशु नहीं, बल्कि आस्था, अर्थव्यवस्था और कृषि जीवन-धारा की प्रतीक रही है; जहां…
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तय कीजिए आप जर्नलिस्ट हैं या एक्टीविस्ट ! -प्रो. संजय द्विवेदी
(प्रो.संजय द्विवेदी) भारतीय मीडिया अपने पारंपरिक अधिष्ठान में भले ही राष्ट्रभक्ति,जनसेवा और लोकमंगल के मूल्यों से अनुप्राणित होती रही हो,…
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महिलाओं के प्रति सम्मान के बिना कैसे आयेगी नर-नारी समता ? – रघु ठाकुर
(रघु ठाकुर) अभी कुछ समय पूर्व संयुक्त राष्ट्र संघ के निर्णयानुसार समूची दुनिया ने विश्व महिला दिवस मनाया। भारत में…
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भारतीय भाषाओं का आपसी संघर्ष अंग्रेजी साम्राज्यवाद की जड़ें और करेगा मजबूत -प्रो.संजय द्विवेदी
भरोसा नहीं होता कि महाराष्ट्र जैसी समावेशी और महान धरती से हिंदी के विरोध में भी कोई बेसुरी आवाज़…
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भारत विदेशी कृषि उत्पादों का बाज़ार बनने को अभिशप्त- डॉ.राजाराम त्रिपाठी
हाल ही में नीति आयोग द्वारा प्रस्तुत एक वर्किंग पेपर ने देश के कृषि जगत में गहरी चिंता और…
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मधु लिमयेःमहान समाजवादी नेता, चिंतक और विचारक- जयशंकर गुप्त
( लिमये जी की 104वीं जयंती पर) जिनके साथ आप कभी बहुत गहरे जुड़े रहे हों, जिनके बारे में…
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