आलेख
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छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति की देश-विदेश में अलग पहचान – छगनलाल लोन्हारे/जी.एस. केशरवानी
(विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त पर विशेष) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ में 32 प्रतिशत जनजातीय समुदाय की आबादी को…
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बजट 24: किसानों के साथ एक बार फिर छलावा- डा.राजाराम त्रिपाठी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट-24 दो मायनों में अभूतपूर्व रहा। पहली तो यह कि देश के इतिहास में पहली…
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ईरान के चुनाव: उम्मीद की नई किरण – रघु ठाकुर
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी दुनिया ने जो प्रतिबंध ईरान पर लगाये थे जिससे ईरान का व्यापार सिकुड़ा…
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देश के 85 प्रतिशत खेत हो रहे बांझ, इसका असल जिम्मेदार कौन ? – राजाराम त्रिपाठी
केन्द्र में एक और नई सरकार चुनकर आ गई है। पिछले 5 सालों में विभिन्न कारणों से किसान लगातार…
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2024 के संसदीय चुनाव परिणाम में छिपा है जनता का संदेश – रघु ठाकुर
लोकसभा के चुनाव परिणाम आ चुके हैं और नई सरकार का गठन भी हो चुका है। इस संसदीय चुनाव में…
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योग से जुड़ता पूरा विश्व – धनंजय राठौर
योग का अर्थ होता है, जुड़ना। योग के माध्यम से आज पूरा विश्व एक परिवार के रूप में जुड़ गया…
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भारत ने फिर साबित किया, कि वह ‘लोकतंत्र की जननी’ – डॉ राजाराम त्रिपाठी एवं एम.राजेन्द्रन
18वीं लोकसभा के चुनावी नतीजे आ गए हैं और दीवार पर लिखी ये इबारत अब साफ पढ़ने में आ…
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पटका सदस्यता राजनीति का पतन – रघु ठाकुर
भारतीय राजनीति के राजनैतिक संस्कृति में निरंतर गिरावट हो रही है। आजादी के समय में कांग्रेस पार्टी जो देश की…
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पर्यावरण दिवस पर वृक्षारोपण या पौधों की हत्या ? – राजाराम त्रिपाठी
देश में सात दशकों की वृक्षारोपण नौटंकी के बावजूद “प्रति व्यक्ति मात्र 28 पेड़” बचे हैं, जबकि विश्व में सबसे…
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कैंडी स्वाद के जानलेवा फंदे में फँसती युवा पीढ़ी – शोभा शुक्ला
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस का मानना है कि “इतिहास खुद को दोहरा रहा है,…
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