आलेख
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ताकतवर मोदी से मुकाबले के लिए क्या बदल रहे है राहुल गांधी ? -राज खन्ना
राहुल गांधी ने विपक्षियों से हमले का एक मौका छीन लिया है। अब तक उनकी विदेश यात्राओं को बेहद गोपनीय…
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अंध विरोध और अंध भक्ति के बीच खामोश जमात-राज खन्ना
भक्त और विरोधियों के अलावा देश में एक और भी जमात बसती है। आमतौर पर यह मुखर नहीं होती।लेकिन इसकी ख़ामोशी…
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राम रहीम की भीड़ के आगे सरकार एवं सिस्टम की ऐसी लाचारी क्यों ? – राज खन्ना
कुछ भी अप्रत्याशित नहीं था। जनता डरी थी। अदालत चेतावनी दे रही थी। सरकार अपने को तैयार बता रही थी।…
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जीएसटी तंत्र से छोटे-मंझोले डीलर्स की बढ़ी परेशानी, उदासीन है सरकार-राज खन्ना
जीएसटी लागू करने की कामयाबी से गदगद केंद्र सरकार उसके अनुपालन में हो रही कठिनाइयों के निदान में फिसड्डी साबित…
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सार्वजनिक संवाद में गिरावट,सनक में बदलती उत्तेजना – संजय द्विवेदी
भारतीय राजनीति और समाज में संवाद के गिरते स्तर और संवाद माध्यमों पर भीड़ के मुखर हो उठने का यह…
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अशोक पांडे : राजनीति में राजनीति से हट कर – राज खन्ना
उनके दल जुदा थे। पर दिल एक था। जो सुलतानपुर को जानते हैं उन्हें अशोक पांडे और राम सिंह के…
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असहिष्णुता की बहस के बीच केरल की राजनीतिक हत्याएं -संजय द्विवेदी
केरल में आए दिन हो रही राजनीतिक हत्याओं से एक सवाल उठना लाजिमी है कि भारत जैसे प्रजातांत्रिक देश में…
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मोदी पर जनविश्वास पर खरा उतरने की चुनौती – संजय द्विवेदी
जिस दौर में राजनीति और राजनेताओं के प्रति अनास्था अपने चरम पर हो, उसमें नरेंद्र मोदी का उदय हमें आश्वस्त…
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