आलेख
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संपादक के विस्थापन का कठिन समय !-प्रो.संजय द्विवेदी
(हिंदी पत्रकारिता के 200 साल) हिंदी पत्रकारिता के 200 साल की यात्रा का उत्सव मनाते हुए हमें बहुत से…
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छत्तीसगढ़ का मंगल पाण्डे लश्कर हनुमान सिंह-धनंजय राठौर
(स्वतंत्रता दिवस पर विशेष) 1857 के विद्रोह को कई नामों से जाना जाता है, जिनमें भारतीय विद्रोह, सिपाही विद्रोह, 1857…
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आदिवासी सत्य : विश्व आदिवासी दिवस पर आत्मचिंतन- डॉ.राजाराम त्रिपाठी
सभी जनजातीय क्षेत्रों में 09 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस तीर-कमान, ढोल-मृदंग और पारंपरिक वेशभूषा तथा पारंपारिक नृत्य के…
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गुलाम थे तो एक थे, आजादी मिलते ही बंट क्यों गए : प्रो. संजय द्विवेदी
भारत गुलाम था तो हमारे नारे थे ‘वंदेमातरम्’ और ‘भारत माता की जय’। आजादी के बहुत सालों बाद नारे गूंजे…
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लोकतंत्र,समता और संपन्नता तीनों चाहिये साथ-साथ – रघु ठाकुर
समाजवादी विचारधारा को लेकर सदैव कई प्रकार के संशय और आरोप लगाए जाते रहे हैं। यद्यपि आजादी के कई वर्षों…
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नकली खाद का जाल, किसान परेशान – डा.राजाराम त्रिपाठी
बीज तो बोया था अमृतमय अन्न का, बोरी वाली खाद डाली थी बढ़िया सरकारी सील-ठप्पे वाली, पर फसल से…
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इजराइल और हमास युद्ध – रघु ठाकुर
इजराइल और हमास के बीच चल रहे दीर्घकालिक युद्ध के बीच इजराइल ने अचानक एक नया मोड़ लिया और ईरान…
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पंच परिवर्तन से बदल जाएगा समाज का चेहरा-मोहरा – प्रो. संजय द्विवेदी
(राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर विशेष) इतिहास के चक्र में किसी सांस्कृतिक संगठन के सौ साल की…
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क्या ‘मांसाहारी-दूध’ के लिए मजबूर किया जा रहा भारत ?- डा.राजाराम त्रिपाठी
जिस देश में गाय मात्र एक पशु नहीं, बल्कि आस्था, अर्थव्यवस्था और कृषि जीवन-धारा की प्रतीक रही है; जहां…
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तय कीजिए आप जर्नलिस्ट हैं या एक्टीविस्ट ! -प्रो. संजय द्विवेदी
(प्रो.संजय द्विवेदी) भारतीय मीडिया अपने पारंपरिक अधिष्ठान में भले ही राष्ट्रभक्ति,जनसेवा और लोकमंगल के मूल्यों से अनुप्राणित होती रही हो,…
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