नए शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि दिमाग की कोशिकाएं लंबे समय तक सक्रिय रहने से कमजोर होकर मर जाती हैं जिससे पार्किंसंस रोग हो सकता है। चूहों पर किए गए अध्ययन में डोपामाइन न्यूरॉन्स की अति सक्रियता से वे नष्ट हो गए। पार्किंसंस रोगियों के दिमाग में भी यही परिवर्तन देखे गए।
शोधकर्ताओं को पहले से पता था कि पार्किंसंस रोग बढ़ने पर दिमाग की कुछ खास नसें या न्यूरस धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं। लेकिन वे यह निश्चित रूप से नहीं जानते थे कि ऐसा क्यों होता है। इस बार हुए अध्ययन में पाया गया कि न्यूरस का लगातार ज्यादा सक्रिय रहना ही उनकी मौत का एक बड़ा कारण हो सकता है।