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मोदी का प्रौद्योगिकी और नवाचार के परिदृश्य को बदलने की आवश्यकता पर जोर

बेंगलुरू 03 जनवरी।प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने भारतीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के परिदृश्‍य को बदलने की आवश्‍यकता पर जोर देते हुए कहा कि भारत के विकास की कहानी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उसकी सफलता पर निर्भर करती है।

श्री मोदी ने आज यहां के कृषि विज्ञान विश्‍वविद्यालय में भारतीय विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत को सतत और पर्यावरण अनुकूल परिवहन तथा ऊर्जा भंडारण विकल्‍पों के लिए दीर्घावधि दिशा निर्देश बनाने चाहिए।उन्होने कहा कि जितनी जल्‍दी संभव हो हर प्रकार के कचरे को संपन्‍नता में बदलने के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्‍होंने कहा कि देश ने पर्यावरण, जल और मृदा संरक्षण के लिए सिगंल यूज़ प्‍लास्टिक का इस्‍तेमाल बंद करने का फैसला किया है।

उन्होने कहा कि डिजिटल टेक्‍नोलॉजी, ई-कॉमर्स, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग सेवाएं ग्रामीणों के लिए मददगार साबित हो रही हैं।उन्‍होंने कहा कि किसानों को अनेक ई-गवर्नेंस सुविधाओं के जरिए मौसम की जानकारी मिल रही है। उन्‍होंने कहा कि अब किसान मध्‍यस्‍थ के बिना सीधे मंडी में अपने उत्‍पाद बेच सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्‍वच्‍छ भारत अभियान और आयुष्‍मान भारत जैसे दुनिया की सबसे बड़ी योजनाओं की अगर सराहना की जा रही है तो उसका श्रेय प्रौद्योगिकी और सुशासन के प्रति हमारे समर्पण को जाता है।

इस अवसर पर केन्‍द्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि इससे पहले की 104वीं विज्ञान कांग्रेस के दौरान घोषित प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को साकार कर लिया गया है। उन्‍होंने कहा कि विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के प्रतिष्ठित प्रकाशनों में बड़ी संख्‍या में लेखों और मौलिक अनुसंधान की गुणवत्‍ता के संदर्भ में भारत का दुनिया में तीसरा स्‍थान है।

 

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