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सरकार का काम कारोबार करना नहीं- मोदी

नई दिल्ली 24 फरवरी।प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने जोर देकर कहा है कि सरकार का व्‍यापार के क्षेत्र में रहने का कोई इरादा नहीं है और वह सार्वजनिक क्षेत्र के ऐसे सभी उपक्रमों के निजीकरण को वचनबद्ध है जो चार महत्‍वपूर्ण क्षेत्रों के अंतर्गत नहीं आते।

श्री मोदी ने कहा कि..सरकार का ये दायित्‍व है कि वो देश के एन्‍टरप्राइज को बिजनेस को पूरा समर्थन दे,लेकिन सरकार खुद एन्‍टरप्राइज चलाएं, उसकी मालिक बनी रहें।आज के युग में न यह आवश्‍यक है,न यह संभव रहा है,इसलिए मैं कहता हूं कि गवर्नमेंट हेज नो बिजनेस टू बी इन बिजनेस, सरकार का फोकस लोगों के वेलफेयर और विकास  से जुड़ी परियोजनाओं पर ही रहना चाहिए।ज्‍यादा से ज्‍यादा सरकार का शक्ति, स्‍वसाधन,सामर्थ्‍य कल्‍याण काम के लिए लगने चाहिए..।

केन्‍द्रीय बजट में किये गये विभिन्‍न सुधारों के बारे में आज एक वेबिनार को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि यह सरकार का दायित्‍व है कि वह उद्यमों और कारोबारों की मदद करे, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि सरकार उनकी स्‍वामी बनी रहे और उन्‍हें चलाये।सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विनिवेश के सरकार के कदम की वकालत करते हुए उन्‍होंने कहा कि बहुत से सार्वजनिक उपक्रम घाटे में चल रहे हैं और इनमें से अर्थव्‍यवस्‍था के लिये बोझ बने कई उपक्रमों को जनता की मदद की आवश्‍यकता है।उन्‍होंने कहा कि सरकारी कंपनियों को सिर्फ इसलिए नहीं चलाया जाना चाहिए, क्‍योंकि वे कई साल पहले खोले गये थे और किसी की पसंदीदा परियोजनाओं में शामिल थे।

श्री मोदी ने कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में सुधार कर रही है, जिसका उद्देश्‍य सार्वजनिक धन का जनता के कल्‍याण कार्यों में उपयोग सुनिश्चित करना है। उन्‍होंने कहा कि सरकारी उपक्रमों के मौद्रीकरण और विनिवेश से जो राशि प्राप्‍त होगी उसका उपयोग विकास परियोजनाओं में किया जायेगा। उन्‍होंने कहा कि सरकार मौद्रीकरण और आधुनिकीकरण के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार जब किसी उपक्रम का मौद्रीकरण करती है तो निजी क्षेत्र उसकी जगह लेता है और इससे निवेश भी बढ़ता है।श्री मोदी ने कहा है कि प्रक्रिया को तेज करने के लिए सचिवों का अधिकार प्राप्‍त समूह बनाया गया है।