आलेख
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दिवाकर मुक्तिबोध : छत्तीसगढ़ की हिंदी पत्रकारिता का चमकदार चेहरा – संजय द्विवेदी
छत्तीसगढ़ यानी वह प्रदेश जहां हिंदी पत्रकारिता की उजली परंपरा का प्रारंभ पं.माधवराव सप्रे ने सन् 1900 में ‘छत्तीसगढ़ मित्र’…
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कमलनाथ और कांग्रेस का अंतिम सत्य – पंकज शर्मा
मध्यप्रदेश-प्रसंग ने भाजपा की जिस नंगई को खुलेआम उज़ागर किया है, उसे अब किसी भी हथेली से ढंकना मुमक़िन नहीं…
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छत्तीसगढ़ में आयकर छापे का असर कितना — दिवाकर मुक्तिबोध
इन दिनों छत्तीसगढ़ की राजनीतिक फ़िज़ा गरमाई हुई है। मसला है दिल्ली से बेहद गुपचुप तरीक़े से राजधानी रायपुर पहुँचे…
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छत्तीसगढ़ के बघेल सरकार की एक और परीक्षा -दिवाकर मुक्तिबोध
छ्त्तीसगढ़ में हाल ही मे सम्पन्न हुए नगर निकायों के चुनावों में कांग्रेस भले ही अपनी पीठ स्वयं थपथपा लें…
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क्या पूर्वोत्तर के लिए जारी ‘एडवायजरी’ हिंदी राज्यों पर लागू नहीं होती – उमेश त्रिवेदी
देश के सत्ताधीशों के काम काज और कारगुजारियां इस बात की ताकीद हैं कि वो इन अंदेशों को लेकर कतई…
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नागरिकता-कानून सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का नया औजार है – उमेश त्रिवेदी
पिछले एक पखवाड़े से लोगों के जहन में यह सवाल खदबदा रहा है कि मोदी नागरिकता संशोधन कानून को लेकर…
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उकता चुके देश का थका-हारा मुखिया – पंकज शर्मा
छह साल पहले नरेंद्र भाई मोदी ने भारतमाता की आंखों में एक ख़्वाब उंड़ेला था–अच्छे दिन आने वाले हैं। इस…
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संविधान दिवस पर संविधान की जीत – रघु ठाकुर
महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बनाने के लिए चले घटनाक्रम के कई निहितार्थ है। जहाँ एक तरफ इस…
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इस ‘राजनीतिक-डर’ में इंदिराजी के आपातकाल की आहट है?- उमेश त्रिवेदी
यदि देश में राजनीतिक समझदारी (?) और राष्ट्रवादी सोच (?) का यह सिलसिला यूं ही चलता रहा तो देश में…
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भारतीय संविधान और डा.राम मनोहर लोहिया -रघु ठाकुर
भारतीय संविधान का निर्माण, आजादी के आंदोलन के दौरान चली एक लंबी प्रक्रिया से हुआ था। 19 वीं सदी के…
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