आलेख
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कोरोना के बाद की दुनिया कैसी होगी? –रघु ठाकुर
कोरोना के वैश्विक संकट से समूची दुनिया में बहस शुरू हुई है और इस महामारी के विश्व पर क्या प्रभाव…
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ट्रम्प पर सितम, मोदी पर करम… ऐ मीडिया, तू ये जुर्म न कर… – उमेश त्रिवेदी
अमेरिका के तथाकथित बे-मुरव्वत, बे-रहम और बे-गैरत मीडिया के शत्रुतापूर्ण सवालों से उत्तेजित अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नाराजी के…
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गांधी और जिन्ना – राज खन्ना
गांधी जी ने कहा,” जब आप बताएंगे कि प्रस्ताव मेरा है, तो जिन्ना कहेंगे “धूर्त गांधी।” माउंटबेटन की टिप्पणी थी,”…
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प्रसंग अर्णब: टीआरपी के लिए ‘मुर्गे’ लड़ाने के शौक में मारे गए ‘गुलफाम’- उमेश त्रिवेदी
प्रसंग-अर्णब के विवादास्पद ’टैक्स्ट’ में प्रेस की कथित आजादी, पत्रकारों की कथित सुरक्षा, वैचारिक-विश्व में ’सहिष्णु’ भाजपा और ’असहिष्णु’ कांग्रेस,…
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समाजवाद के बिना संविधान अधूरा-रघु ठाकुर
टेलीविजन नहीं होने के कुछ फायदे भी हैं यद्यपि कुछ नुकसान भी हैं कि कई घटनाओं की तुरंत जानकारी नहीं…
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मुमुक्षु-भवन की खिडकी से दिखता चांद-पंकज शर्मा
बचपन से सुनते आ रहे थे कि भैया, मनुष्य बली नहीं होता है, बलवान तो समय होता है; वरना वही…
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लाकडाउन और उसके परिणाम – रघु ठाकुर
दुनिया में करोना संक्रमित लोगों की संख्या आज तक (18 अप्रैल)22 लाख से अधिक हो चुकी है और भारत में…
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कोरोना के मानवीय तकाजों के आईने में मोदी का भाषण – उमेश त्रिवेदी
कोरोना एपिसोड के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चौथे राष्ट्रीय संबोधन के कुछ घंटों के भीतर ही मुंबई के बांद्रा स्टेशन…
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विभाजन की कीमत पर आजादी- राज खन्ना
गांधी जी ने हल्की शिकायत की मुद्रा में कहा,” नेहरु और सरदार पटेल ने उसकी सूचना उन्हें नही दी।” गांधी…
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लॉक डाउन-2: कोरोना के साथ आर्थिक-मंदी के रोगाणु भी सक्रिय – उमेश त्रिवेदी
भारत, कोविड-19 से लड़ाई के दूसरे दौर की शुरूआत में, जबकि देश इक्कीस दिनों के लॉकडाउन-1 की भली-बुरी मजबूर यादों…
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