आलेख
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बेढब दौर के जनद्रोहियों की दास्तान-पंकज शर्मा
सवाल कांग्रेस का नहीं है, सवाल भारतीय जनता पार्टी का नहीं है, सवाल सचिन पायलट का नहीं है और सवाल…
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कोरोना काल में आत्महत्याओं की ओर बढ़ता भारत – रघु ठाकुर
कोरोना महामारी के संक्रमण की चेन को काटने के लिए लगभग सारी दुनिया में लाकडाउन को कारगर तरीका माना गया।यद्यपि…
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सरदार पटेल और जूनागढ़- राज खन्ना
जूनागढ़ ने सरदार पटेल की कश्मीर को लेकर सोच बदली। जूनागढ़ और हैदराबाद हिन्दू बहुल आबादी और मुस्लिम शासित रियासतें।…
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चन्द्रशेखर की सरकार क्यों बनी ; क्यों गिरी ?- राज खन्ना
(पुण्यतिथि 08 जुलाई पर विशेष) चन्द्रशेखर की पहचान उनके बेबाक- बेलौस लहजे से जुड़ी हुई थी। एक निर्भीक-निडर नेता…
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नई भाजपा का ‘गांधी’, ‘समाजवादी’ नहीं रहा, वह सिर्फ ‘बनिया’ हैं…- उमेश त्रिवेदी
भाजपा के राजनीतिक आख्यानों में सौ-सवा सौ दिन पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया का उदय एक पहेली की तरह कई सवालों के…
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‘चंबल’ के बीहड़ों में ‘अरावली’ की स्थापना से पिघलता ‘इको-सिस्टम’- उमेश त्रिवेदी
कांग्रेस से भाजपा के नेता बने ज्योतिरादित्य सिंधिया के सुदर्शन और सजीले व्यक्तित्व में ’टाइगर’ की काली-पीली रेखाओं का उभार…
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इतिहास के फड़फड़ाते पन्नों के आगोश में – पंकज शर्मा
‘थ्री- नॉट-थ्री बहुमत है तो क्या हुआ? क्या बहुसंख्या के इस तकनीकी तर्क की आड़ में हम आज की ज़मीनी…
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कोरोना काल में सूखा बाढ़ मुक्ति का शुरू हो राष्ट्रीय अभियान- रघु ठाकुर
देर से ही सही भारत सरकार ने कोरोना और उसके संक्रमण को फैलने से रोकने के लिये अपनी हठवादिता में…
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‘रोटी की चाह’ – ‘उस पथ पर देना फेंक,जिस पथ चले श्रमिक अनेक’- उमेश त्रिवेदी
औरंगाबाद में बदनापुर और करमाड़ के बीच शुक्रवार को तड़के एक मालगाड़ी की चपेट में आने वाले 16 प्रवासी मजदूरों…
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ऐसी प्रजा कहां मिलती, नरेंद्र भाई ! – पंकज शर्मा
मैं ऐसे बहुत-से लोगों को जानता हूं, जो छह साल पहले मानते थे कि भारत को नरेंद्र भाई मोदी से…
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