आलेख
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‘चंबल’ के बीहड़ों में ‘अरावली’ की स्थापना से पिघलता ‘इको-सिस्टम’- उमेश त्रिवेदी
कांग्रेस से भाजपा के नेता बने ज्योतिरादित्य सिंधिया के सुदर्शन और सजीले व्यक्तित्व में ’टाइगर’ की काली-पीली रेखाओं का उभार…
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इतिहास के फड़फड़ाते पन्नों के आगोश में – पंकज शर्मा
‘थ्री- नॉट-थ्री बहुमत है तो क्या हुआ? क्या बहुसंख्या के इस तकनीकी तर्क की आड़ में हम आज की ज़मीनी…
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कोरोना काल में सूखा बाढ़ मुक्ति का शुरू हो राष्ट्रीय अभियान- रघु ठाकुर
देर से ही सही भारत सरकार ने कोरोना और उसके संक्रमण को फैलने से रोकने के लिये अपनी हठवादिता में…
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‘रोटी की चाह’ – ‘उस पथ पर देना फेंक,जिस पथ चले श्रमिक अनेक’- उमेश त्रिवेदी
औरंगाबाद में बदनापुर और करमाड़ के बीच शुक्रवार को तड़के एक मालगाड़ी की चपेट में आने वाले 16 प्रवासी मजदूरों…
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ऐसी प्रजा कहां मिलती, नरेंद्र भाई ! – पंकज शर्मा
मैं ऐसे बहुत-से लोगों को जानता हूं, जो छह साल पहले मानते थे कि भारत को नरेंद्र भाई मोदी से…
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‘घर-वापसी’ के सवालों में घिरा ‘पीएम केअर्स फंड’ का इस्तेमाल – उमेश त्रिवेदी
कोविड-19 के दरम्यान तबलीगी जमात, सेना की पुष्प वर्षा और राष्ट्रीय एकता की मजबूती से जुड़े घटनाक्रमों के बीच हाशिए…
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विभाजन और महात्मा गांधी – राज खन्ना
गांधी जी बैठक में नही थे। पर कार्यवाही में छाए हुए थे। देश की किस्मत का फैसला लिया जा चुका…
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कोरोना की कराहों में सेना के जरिए ‘वाह-वाह’ की तलाश…- उमेश त्रिवेदी
देश में कोरोना से लड़ने वाले भारत के कर्मवीर योद्धाओं के वंदन अभिनंदन के प्रसंग में भारतीय सेना की गैरजरूरी…
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दर्शकों की ‘रियल-लाइफ’ में ‘रील-लाइफ’ का रोमांच थे इरफान… – उमेश त्रिवेदी
‘इरफान का पूरा नाम साहबजादे ’इरफान’ अली खान था और उनके पिता कहा करते थे कि वह पठान-परिवार मे पैदा…
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‘नास्त्रेदमस’ के मोदी और ‘सतयुग’ में ‘सियासी-सत्कर्म’(?) की कहानी – उमेश त्रिवेदी
विश्व-गुरू’ और ’वैश्विक आर्थिक शक्ति’ बनने के लिए आतुर भारत के प्रारब्ध को लेकर लोगों के मन में उत्सुकता स्वाभाविक…
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