Friday , February 3 2023
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आलेख

इस ‘राजनीतिक-डर’ में इंदिराजी के आपातकाल की आहट है?- उमेश त्रिवेदी

यदि देश में राजनीतिक समझदारी (?) और राष्ट्रवादी सोच (?) का यह सिलसिला यूं ही चलता रहा तो देश में राष्ट्रहित से खिलवाड़ करने वाले नागरिकों की संख्या में दिन दूना रात चौगुना इजाफा होने से कोई भी नहीं रोक पाएगा। मोदी-सरकार के कार्यकाल में राष्ट्रद्रोह के संवैधानिक और कानून …

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भारतीय संविधान और डा.राम मनोहर लोहिया -रघु ठाकुर

भारतीय संविधान का निर्माण, आजादी के आंदोलन के दौरान चली एक लंबी प्रक्रिया से हुआ था। 19 वीं सदी के आंरभ से ही यह चर्चा शुरु हुई थी कि, भारत के संविधान को ब्रिटिश कानूनो से नही वरन भारतीय जनता के द्वारा निर्वाचित संविधान सभा के द्वारा निर्मित होना चाहिये। …

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महाराष्ट्र की सियासत: ‘सवाल यह है कि हवा आई किस इशारे पर…?’- उमेश त्रिवेदी

‘चराग किसके बुझे ये सवाल थोड़ी है, सवाल यह है कि हवा आई किस इशारे पर…?’ शायर नादिम नदीम ने यह शेर कब और किन हालात में लिखा होगा, कहना मुश्किल है, लेकिन फिलवक्त इस शेर में देश की मौजूदा सियासत को कुरेदने का पूरा सामान मौजूद है। सबब यह …

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नीतीश की गुमशुदगी के बाद पवार विपक्षी-ध्रुवीकरण की धुरी बनेगें? – उमेश त्रिवेदी

महाराष्ट्र में सत्ता के सिंहासन से फिसलने के बाद भाजपा के पावर-कॉरिडोर में उठने वाली राजनीतिक आहों और कराहों की अनुगूंज जल्दी ठंडी होने वाली नहीं है, क्योंकि इस घटनाक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की आत्म-मुग्धता का वह कवच तड़क गया है, जो उनके अजेय होने …

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पवार ने महाराष्ट्र में भाजपा को ‘गोवा-एपीसोड’ दोहराने नहीं दिया- उमेश त्रिवेदी

महाराष्ट्र में भाजपा, शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के बीच किसी भी तरीके से सरकार में काबिज होने की होड़ में घटित अनैतिक, अमर्यादित और अलोकतांत्रिक राजनीतिक घटनाओं के धारावाहिक के उत्तरार्ध में, जबकि यह तय हो चुका है कि उध्दव ठाकरे महाराष्ट्र के ऩए मुख्यमंत्री होगे, फलक पर ऐसे कई …

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नेहरू के विमर्श में ही निहित है मौजूदा ‘हेट-पोलिटिक्स’ का जवाब – उमेश त्रिवेदी

राजनीतिक बदजुबानी और बदगुमानी के इस दौर में, जबकि आजादी की लड़ाई के नुमाइंदे हमारे पुरखों की ऐतिहासिक विरासत की इबारत में जहर घोलने की कोशिशें परवान पर हैं, जवाहरलाल नेहरू की राष्ट्रीय-पुण्यायी का सस्वर, समवेत पुनर्पाठ अपरिहार्य होता जा रहा है। सारे भारतवासियों को, जो राष्ट्र-निर्माण में जवाहरलाल नेहरू …

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राम-मंदिर की ‘ब्लॉक-बस्टर’ सफलता के बाद क्या भाजपा की राहें बदलेंगी? – उमेश त्रिवेदी

न्याय-अन्याय और राजनीति की कसौटियों पर लगभग अयोध्या के 134 साल पुराने राम-मंदिर के कानूनी-विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के 1045 पेजों के वृहदाकार फैसले की परतों का विश्‍लेषण लंबे समय तक होता रहेगा, क्योंकि विभिन्न कोणों से होने वाली इसकी विवेचनाओं के ’शेड्स’ इसके कैनवास के चरित्र को अपने-अपने तरीके …

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अयोध्याः लम्बे विवाद पर पूर्ण विराम-राज खन्ना

सुप्रीम अदालत ने कोई गुंजाइश नही छोड़ी है। बेशक वक्त लंबा लगा। पर उसका फैसला क्रियान्वयन के लिए किसी अवसर की गुंजाइश नही छोड़ता। सरकार को तीन महीने के भीतर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट का गठन करना और निर्माण की प्रक्रिया तय करनी है। यह मुमकिन नही है कि …

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20 अक्टूबर 1962 को हुए चीनी हमले के 57 साल बाद ? -राज खन्ना

पराजय-अपमान से जुड़ी तारीखें कौन याद रखना चाहेगा ? पर उनसे मुँह चुराना भारी पड़ता है। चीनी हमले की तारीख 20 अक्टूबर 1962 को इसी लिए याद किया जाना चाहिए। सीख-सबक के लिए। याद रखने के लिये के लिए कि वक्त पर मिली चेतावनी की अनदेखी की देश को कितनी …

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हनी ट्रैप कांड और पुरूषवादी समाज – रघु ठाकुर

पिछले लगभग एक माह से म.प्र. की राजनीति और मीडिया में हनी ट्रैप कांड प्रमुखता पर है, ऐसे कांड का प्रमुखता से होना स्वाभाविक भी है, क्योंकि प्रदेश की राजनीति पर इसके कई प्रकार के प्रभाव संभावित है। हनी ट्रैप कांड जैसे कांड बंधे समाज में एक हलचल पैदा करते …

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