आलेख
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सुल्तानपुर से मेनका गांधी का परिचय पुराना- राज खन्ना
मेनका गांधी का सुल्तानपुर से परिचय पुराना है। पति संजय गांधी की मृत्यु के बाद अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत…
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न्याय-योजना: राष्ट्रवाद की अमूर्त अदालत में गरीबी की जिंदा दलीलें – उमेश त्रिवेदी
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस ऐलान की गूंज गरीबों की झोपड़ियों और मुफलिसों के टपरों तक भले ही पूरी…
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अमेठी क्यों पूछी जाती है…….? – राज खन्ना
अमेठी का रण 2014 के नतीजे के फौरन बाद 2019 के लिए सज गया था। भाजपा तभी से तैयारी में…
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कांग्रेस और भाजपा की बेचैनी बढ़ा रही है ग्वालियर चंबल घाटी- अरुण पटेल
मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों पर जीत का परचम लहराने का सपना भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दो…
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अब संजय गांधी की किसे याद ! -राज खन्ना
मई का सूरज तप रहा था।सत्ता का भी।संविधान ताख पर था।उसकी बात करने वाले जेल में।ये इमरजेंसी के अंधियारे दिन…
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छत्तीसगढ़ः एक हारी हुई बाज़ी – दिवाकर मुक्तिबोध
तीन माह पूर्व विधानसभा चुनाव में बुरी तरह पराजित प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी चिंता इस बात को…
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अमेठीः किलो-किलो बाकी है ! – राज खन्ना
गुलाबी ठंड की गुनगुनी धूप में अमेठी इठलाई हुई थी।खूब उत्साहित।हंसते-मुस्कुराते-नारे लगाते लोग।उनके सांसद और तबके प्रधानमंत्री राजीव गांधी मंच…
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कमलनाथ-सिंधिया ‘सुनिश्चित’ जीत और ‘संदिग्ध’ जीत में फर्क समझेंगे? – उमेश त्रिवेदी
रविवार को भोपाल में मीडिया से मुखातिब कांग्रेस के महामंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सियासत के तारों को छेड़ते हुए गहरा…
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सुल्तानपुर उम्मीद लगाए रहता है !! – राज खन्ना
चुनाव आते ही यह दर्द और शिद्दत से सामने आता है।दोहराया जाता है।उम्मीदें बन्धती हैं।फिर-फिर टूटती हैं।पूर्वांचल के तमाम अभावों-विपदाओं…
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म.प्र. में बड़ी चुनौती: पारिवारिक मोह छोड़ें या जिताऊ चेहरा तलाशें? – अरुण पटेल
लोकसभा चुनाव के लिए तारीखों की घोषणा के साथ ही चुनावी बिसात बिछना तेज हो गया है और 26 सीटों…
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