आलेख
-
मुमुक्षु-भवन की खिडकी से दिखता चांद-पंकज शर्मा
बचपन से सुनते आ रहे थे कि भैया, मनुष्य बली नहीं होता है, बलवान तो समय होता है; वरना वही…
Read More » -
लाकडाउन और उसके परिणाम – रघु ठाकुर
दुनिया में करोना संक्रमित लोगों की संख्या आज तक (18 अप्रैल)22 लाख से अधिक हो चुकी है और भारत में…
Read More » -
कोरोना के मानवीय तकाजों के आईने में मोदी का भाषण – उमेश त्रिवेदी
कोरोना एपिसोड के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चौथे राष्ट्रीय संबोधन के कुछ घंटों के भीतर ही मुंबई के बांद्रा स्टेशन…
Read More » -
विभाजन की कीमत पर आजादी- राज खन्ना
गांधी जी ने हल्की शिकायत की मुद्रा में कहा,” नेहरु और सरदार पटेल ने उसकी सूचना उन्हें नही दी।” गांधी…
Read More » -
लॉक डाउन-2: कोरोना के साथ आर्थिक-मंदी के रोगाणु भी सक्रिय – उमेश त्रिवेदी
भारत, कोविड-19 से लड़ाई के दूसरे दौर की शुरूआत में, जबकि देश इक्कीस दिनों के लॉकडाउन-1 की भली-बुरी मजबूर यादों…
Read More » -
कोरोनाः धरती को महज़ सैरग़ाह समझने का नतीजा- पंकज शर्मा
मैं बचूंगा तो विचार बचेगा, विचारधारा बचेगी। पहले ख़ुद तो बच जाऊं, तब जनतंत्र का सोचूं, वाम-दक्षिण का सोचूं। यह…
Read More » -
सरदार पटेलःजिनकी नेहरु भी करते थे पूरी कद्र और इज्ज़त – राज खन्ना
विभाजन की पीड़ा थी। पर उसकी अनिवार्यता और जिम्मेदारी कुबूल करने को लेकर वह दो टूक थे। 11 अगस्त 1947…
Read More » -
कोरोना के कहर में ‘न्यूज-इवेंट’ और ऐतिहासिकता की तलाश – उमेश त्रिवेदी
कोरोना महामारी का भयावह प्रकोप आजाद भारत की उन गिनी-चुनी घटनाओं में शुमार है, जिससे निपटने के राजनीतिक और प्रशासनिक…
Read More » -
चीनी- कविता में छलकता मजदूरों का दर्द और कोरोना का पलायन – उमेश त्रिवेदी
दुनिया के 130 देशों को अपने शिकंजे में जकड़े कोविड-19 की पैदाइश चीन की है और नीचे लिखी कविता जिस…
Read More » -
‘बंद गली के आखिरी मकान’ में कोरोना व रोशनी की जद्दोजहद – उमेश त्रिवेदी
बंद गली का आखरी मकान -‘दायीं ओर कच्ची दीवार, जिसमें बीच-बीच में गोबर का लेप उघड़ गया था। बीच में…
Read More »